नागरिकता कानून का विरोध जारी, देवबंद में फिर नारेबाजी, मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी
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पुलिस की लाख कोशिशों के बाद भी देवबंद में नागरिकता कानून व जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली में छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई के खिलाफ विरोध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को इस्लामी तालीम के दूसरे बड़े इदारे दारुल उलूम वक्फ में छात्रों ने नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। हालांकि बाद में संस्था के जिम्मेदारों ने समझा कर शांत कराया।
बुधवार को दारुल उलूम वक्फ में नागरिकता कानून और दिल्ली जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र- छात्राओं पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई के खिलाफ मदरसा छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने नारेबाजी करते हुए दोनों मामलों पर विरोध दर्ज कराया। दरअसल, सुबह के समय संस्था में बच्चों को वर्तमान हालात से रूबरू कराने के लिए मोहतमिम के संबोधन का कार्यक्रम रखा गया था। इस दौरान छात्र परिसर में जमा हो गए। जिन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की घटना पर रोष जताते हुए जमकर नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इस बीच वहां पहुंचे इदारे के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी ने समझा कर उन्हें शांत किया। साथ ही कहा कि देश में इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत अमन बनाए रखने की है। आप लोग जिन अंदेशों को लेकर परेशान हैं उनके निदान के लिए हमारे रहबर लगातार कोशिश कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि इस तरह जोश में आकर होश खो देने से कोई लाभ होने वाला नहीं है। इसके उलट इदारों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। शेखुल हदीस सैय्यद अहमद खिजर शाह मसूदी ने कहा कि मदरसों की तारीख गवाह है कि हमने जिम्मेदार नागरिक बनाने का काम किया है। इसलिए सभी की जिम्मेदारी बनती है कि इस नाजुक दौर में सही नेतृत्व किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों से विरोध प्रदर्शन का हिस्सा न बनने का आह्वान किया।
वहीं, छात्रों के हंगामे की सूचना पर दारुल उलूम वक्फ पहुंचे एसपी देहात डॉ. विद्या सागर मिश्र व एसडीएम राकेश कुमार पुलिस फोर्स के साथ वहां पहुंचे और प्रबंधतंत्र के साथ बैठक की। इस दौरान अधिकारियों ने प्रबंधतंत्र ने इदारे की छुट्टी किए जाने का आग्रह किया, लेकिन प्रबंधतंत्र ने दारुल उलूम के निर्णय के बाद छुट्टी किए जाने की बात कही।
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