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जन्म और मरण की प्रक्रिया निरंतर चलती है
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भक्तामर विधान में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
- फोटो : MAWANA
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के आज 15वें दिन सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य डॉ. सागर, स्वर्ण कलश से अभिषेक का सारंग विलास पुरवत, शांतिधारा करने का रविंद्र पाटिल, दीपक पुरवत, बाबूराव, प्रद्युम्न को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन कुमुदिनी विलास पुरवन, कावेरी पाटिल, जयश्री, सुषमा, कोमल ने किया। विधान कराने वाले सभी धर्म प्रेमी बंधुओं के उज्जवल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए । आज 101 परिवारों की ओर से विधान कराया गया। जिसमें मुख्य रूप से विनीता जैन, सुधीर जैन, शुभम जैन, तनिषा जैन, सूर्यकांता जैन, महावीर प्रसाद जैन, प्रीति, संजय, बरखा, प्रवीण, प्राची, श्रेयांश, प्रियांश, गुनगुन जैन संजू टेक्सटाइल्स, शोभा जैन तुषार कांत जैन, आशी जैन, आयुष जैन शामिल हुए।
भक्तामर पाठ का शुभारंभ चंचल जैन मनोज जैन ने संस्कृत भाषा में किया। इसी बीच अनेक प्रांतों से पधारे हुए यात्री भाई एवं कुमुदिनी विलास, जयश्री दीपक, सविता उमर पाटिल, सुनंदा प्रशांत, गंगा धनपाल, वर्धमान माणिक राव पाटिल, ओमवती, खेमचंद, निशा, मुकेश, सुनीता, विनय, राधा हरीश, कविता, अजय, मंजू, किशन नीलू, मुकेश, मीरा नरेश सुरेशचंद, पुष्पा, संतोष, अतुल, रिंकी, अभिषेक, पूनम, अंकुर जैन ने पाठ का वाचन किया। परम पूज्य गुरुवर भावभूषण जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है। जन्म और मरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। आज के विधान का विसर्जन सुशील जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन गुरुकुल के बच्चों ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रंजीता, रानी जैन हस्तिनापुर ने किया। आरती का दीप प्रज्ज्वलन बा.ब्र. सुनीता दीदी व चंदन भैया ने किया। इस दौरान मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम जैन, विपिन शर्मा आदि का विशेष सहयोग।
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आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य डॉ. सागर, स्वर्ण कलश से अभिषेक का सारंग विलास पुरवत, शांतिधारा करने का रविंद्र पाटिल, दीपक पुरवत, बाबूराव, प्रद्युम्न को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन कुमुदिनी विलास पुरवन, कावेरी पाटिल, जयश्री, सुषमा, कोमल ने किया। विधान कराने वाले सभी धर्म प्रेमी बंधुओं के उज्जवल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए । आज 101 परिवारों की ओर से विधान कराया गया। जिसमें मुख्य रूप से विनीता जैन, सुधीर जैन, शुभम जैन, तनिषा जैन, सूर्यकांता जैन, महावीर प्रसाद जैन, प्रीति, संजय, बरखा, प्रवीण, प्राची, श्रेयांश, प्रियांश, गुनगुन जैन संजू टेक्सटाइल्स, शोभा जैन तुषार कांत जैन, आशी जैन, आयुष जैन शामिल हुए।
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भक्तामर पाठ का शुभारंभ चंचल जैन मनोज जैन ने संस्कृत भाषा में किया। इसी बीच अनेक प्रांतों से पधारे हुए यात्री भाई एवं कुमुदिनी विलास, जयश्री दीपक, सविता उमर पाटिल, सुनंदा प्रशांत, गंगा धनपाल, वर्धमान माणिक राव पाटिल, ओमवती, खेमचंद, निशा, मुकेश, सुनीता, विनय, राधा हरीश, कविता, अजय, मंजू, किशन नीलू, मुकेश, मीरा नरेश सुरेशचंद, पुष्पा, संतोष, अतुल, रिंकी, अभिषेक, पूनम, अंकुर जैन ने पाठ का वाचन किया। परम पूज्य गुरुवर भावभूषण जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है। जन्म और मरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। आज के विधान का विसर्जन सुशील जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन गुरुकुल के बच्चों ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रंजीता, रानी जैन हस्तिनापुर ने किया। आरती का दीप प्रज्ज्वलन बा.ब्र. सुनीता दीदी व चंदन भैया ने किया। इस दौरान मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम जैन, विपिन शर्मा आदि का विशेष सहयोग।
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