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प्रो. आरपी सिंह के कार्यकाल में सीसीएसयू में खूब हुआ था भ्रष्टाचार
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प्रो. आरपी सिंह के कार्यकाल में सीसीएसयू में खूब हुआ था भ्रष्टाचार
मेरठ। 2.20 लाख रुपये की घूस लेने के मामले में सोमवार को गिरफ्तार किए गए अजमेर की महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. आरपी सिंह का भ्रष्टाचार का ये पहला मामला नहीं है। साल 2003 से 2005 तक चौधरी चरण सिंह विवि के कुलपति रहते हुए उन पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की दर्जनों शिकायतों पर राजभवन की जांच में वे दोषी पाए गए थे। इन्होंने विवि के पूरे सिस्टम को घूसखोरी का अड्डा बना दिया था। इतना ही नहीं कैंपस की शिक्षिका कविता हत्याकांड में चर्चित सीडी सामने आने के बाद सीबीआई ने उनसे लंबी पूछताछ की थी।
सीसीएसयू में दो मार्च 2003 को प्रो. आरपी सिंह ने कुलपति के रूप में चार्ज संभाला। कैंपस में वैसे तो तमाम कुलपतियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, लेकिन प्रो. आरपी सिंह के कार्यकाल में पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचारी हो गया था। विरोध करने वालों को ये बीएड के कॉलेज खुलवाकर चुप करा देते थे। छात्रों से कहते थे, पैसे कमाओ, हंगामों के चक्कर में मत पड़ो। ये तमाम शिकायतें राजभवन से लेकर राष्ट्रपति तक पहुंची तो जांच शुरू हुई थी। उच्च स्तरीय जांच में प्रो. आरपी सिंह द्वारा करोड़ों रुपये की घूस लेकर डेढ़ सौ से ज्यादा बीएड एवं दूसरे सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों को गलत तरह से मान्यता देने की बात सामने आई थी। आरपी सिंह के कार्यकाल में भवनों के ठेकों में भारी घपले हुए। नियुक्तियों में अनियमितताएं हुईं। सीपीएमटी की प्रवेश परीक्षा में अपने चहेते शिक्षक को एडवांस में एक करोड़ 40 लाख रुपये का पेमेंट करा दिया गया।
संदीप पहल ने की थी राजभवन में शिकायत
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संदीप पहल की शिकायतों पर राजभवन ने आरपी सिंह को दोषी माना था। 27 जून 2005 को उनको बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्तगी के खिलाफ आरपी सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट ने सुबूत और गंभीर आरोपों के चलते उनकी याचिका को खारिज कर दिया। आरपी सिंह के खिलाफ इन तमाम मामलों में विजिलेंस की तरफ से मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। लेकिन इतने सालों बाद भी जांच का कुछ नहीं हुआ। राजनीति संरक्षण के चलते पूरा मामला दब गया।
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सीबीआई ने की थी कविता हत्याकांड में पूछताछ
सीसीएसयू की लेक्चरर कविता चौधरी की 2006 में हुई हत्या के बाद प्रो. आरपी सिंह भी सीबीआई जांच के घेरे में आए थे। कविता के साथ उनकी कथित सीडी सामने आने के बाद सीबीआई ने उनको जांच में शामिल किया था। हालांकि बाद में इनके खिलाफ हत्या में शामिल होने के सुबूत नहीं मिलने पर कोर्ट में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दी थी।
विवि में रही दिनभर चर्चा
विवि में प्रो. आरपी सिंह के पकड़े जाने के बाद दिनभर चर्चाएं रहीं। कई शिक्षकों का कहना था कि वो इतना बड़ा भ्रष्टाचारी है कि इस बार भी बचकर निकल जाएगा। जब बर्खास्तगी के बाद पहले जोधपुर में और अब अजमेर में एमडीएस विवि का कुलपति बना दिया गया तो साफ है कि ऐसे लोगों को कितना बड़ा संरक्षण मिला हुआ है।
ये है मामला
राजस्थान के अजमेर के महर्षि दयानंद सरस्वती विवि के कुलपति प्रो. आरपी सिंह और उनके निजी गार्ड रणजीत सिंह को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने सोमवार को 2 लाख 20 हजार की रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया। एसीबी जयपुर और अजमेर की टीमों ने नागौर के एक प्राइवेट कॉलेज में सीटें बढ़ाए जाने के मामले में ली जा रही घूस के मामले में यह कार्रवाई की है।
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मेरठ। 2.20 लाख रुपये की घूस लेने के मामले में सोमवार को गिरफ्तार किए गए अजमेर की महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. आरपी सिंह का भ्रष्टाचार का ये पहला मामला नहीं है। साल 2003 से 2005 तक चौधरी चरण सिंह विवि के कुलपति रहते हुए उन पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की दर्जनों शिकायतों पर राजभवन की जांच में वे दोषी पाए गए थे। इन्होंने विवि के पूरे सिस्टम को घूसखोरी का अड्डा बना दिया था। इतना ही नहीं कैंपस की शिक्षिका कविता हत्याकांड में चर्चित सीडी सामने आने के बाद सीबीआई ने उनसे लंबी पूछताछ की थी।
सीसीएसयू में दो मार्च 2003 को प्रो. आरपी सिंह ने कुलपति के रूप में चार्ज संभाला। कैंपस में वैसे तो तमाम कुलपतियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, लेकिन प्रो. आरपी सिंह के कार्यकाल में पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचारी हो गया था। विरोध करने वालों को ये बीएड के कॉलेज खुलवाकर चुप करा देते थे। छात्रों से कहते थे, पैसे कमाओ, हंगामों के चक्कर में मत पड़ो। ये तमाम शिकायतें राजभवन से लेकर राष्ट्रपति तक पहुंची तो जांच शुरू हुई थी। उच्च स्तरीय जांच में प्रो. आरपी सिंह द्वारा करोड़ों रुपये की घूस लेकर डेढ़ सौ से ज्यादा बीएड एवं दूसरे सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों को गलत तरह से मान्यता देने की बात सामने आई थी। आरपी सिंह के कार्यकाल में भवनों के ठेकों में भारी घपले हुए। नियुक्तियों में अनियमितताएं हुईं। सीपीएमटी की प्रवेश परीक्षा में अपने चहेते शिक्षक को एडवांस में एक करोड़ 40 लाख रुपये का पेमेंट करा दिया गया।
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संदीप पहल ने की थी राजभवन में शिकायत
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संदीप पहल की शिकायतों पर राजभवन ने आरपी सिंह को दोषी माना था। 27 जून 2005 को उनको बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्तगी के खिलाफ आरपी सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट ने सुबूत और गंभीर आरोपों के चलते उनकी याचिका को खारिज कर दिया। आरपी सिंह के खिलाफ इन तमाम मामलों में विजिलेंस की तरफ से मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। लेकिन इतने सालों बाद भी जांच का कुछ नहीं हुआ। राजनीति संरक्षण के चलते पूरा मामला दब गया।
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सीबीआई ने की थी कविता हत्याकांड में पूछताछ
सीसीएसयू की लेक्चरर कविता चौधरी की 2006 में हुई हत्या के बाद प्रो. आरपी सिंह भी सीबीआई जांच के घेरे में आए थे। कविता के साथ उनकी कथित सीडी सामने आने के बाद सीबीआई ने उनको जांच में शामिल किया था। हालांकि बाद में इनके खिलाफ हत्या में शामिल होने के सुबूत नहीं मिलने पर कोर्ट में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दी थी।
विवि में रही दिनभर चर्चा
विवि में प्रो. आरपी सिंह के पकड़े जाने के बाद दिनभर चर्चाएं रहीं। कई शिक्षकों का कहना था कि वो इतना बड़ा भ्रष्टाचारी है कि इस बार भी बचकर निकल जाएगा। जब बर्खास्तगी के बाद पहले जोधपुर में और अब अजमेर में एमडीएस विवि का कुलपति बना दिया गया तो साफ है कि ऐसे लोगों को कितना बड़ा संरक्षण मिला हुआ है।
ये है मामला
राजस्थान के अजमेर के महर्षि दयानंद सरस्वती विवि के कुलपति प्रो. आरपी सिंह और उनके निजी गार्ड रणजीत सिंह को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने सोमवार को 2 लाख 20 हजार की रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया। एसीबी जयपुर और अजमेर की टीमों ने नागौर के एक प्राइवेट कॉलेज में सीटें बढ़ाए जाने के मामले में ली जा रही घूस के मामले में यह कार्रवाई की है।