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स्वयं पोर्टल की समस्याओं को किया प्रस्तुत

Wed, 04 Jun 2025 01:48 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Jun 2025 01:48 AM IST
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presented the problems of the portal itself
सीसीएसयू के वनस्पति विज्ञान विभाग में आयोजित की गई बैठक
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में एनपीटीईएल आईआईटी कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में स्वयं पोर्टल के उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारियों की प्रथम समीक्षा बैठक हुई। विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला भी मौजूद रही।
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बैठक का शुभारंभ डॉ. सचिन कुमार ने किया। डॉ. अंगना सेन गुप्ता एनपीटीईएल, आईआईटी कानपुर ने विशेषज्ञ के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रदेश के विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों से नोडल अधिकारियों ने अपने-अपने विश्वविद्यालय स्तर पर स्वयं पोर्टल के माध्यम से संचालित पाठ्यक्रमों के लागू किए जाने की स्थिति और उसमें आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयां और समस्याओं को विस्तार से प्रस्तुत किया। बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों में अद्यतन स्वयं पाठ्यक्रमों की स्थिति पर चर्चा की। बैठक में लखनऊ विवि से डॉ. किरण, अवध विवि से डॉ. प्रशांत, जौनपुर से डॉ. प्रमोद, बरेली से डॉ. जनक कपूर, बलिया से डॉ. नीलमणि, डॉ. पल्लवी आर्य, डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि आगरा, डॉ. सुमेश, महेंद्र प्रताप सिंह विवि, अलीगढ़, डॉ. सुदर्शन, सहारनपुर डॉ. मलिक, राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय डॉ. अवनीश, बुंदेलखंड विवि डॉ. अंशुल, सीसीएसयू से प्रो. जयमाला, प्रो कृष्णकांत शर्मा, डॉ. वाईपी सिंह, डॉ. दीपिका आदि मौजूद रहे।
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महाविद्यालय में स्थापित होंगे लोकल चेप्टर
विश्वविद्यालय स्तर पर एक नोडल अधिकारी के माध्यम से सभी संबद्ध महाविद्यालयों में स्वयं पाठ्यक्रम संचालित कराया जाना और इससे संबंधित सभी सूचनाओं को अद्यतन रखना असंभव है। ऐसे में महाविद्यालयों में भी इसके लोकल चेप्टर स्थापित किए जाएं तथा महाविद्यालयों को भी डैशबोर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में हिंदी माध्यम के छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक है। एनपीटीईएल पर संचालित ऐसे पाठ्यक्रमों का चुनाव किया जाए जिनका अनुवाद अथवा ट्रांसक्रिप्शन हो चुका है। डॉ. अंगना सेन गुप्ता और डॉ. लालती दत्ता ने बताया कि एनपीटीईएल 11 भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रमों के अनुवाद पर काम कर रहा है।
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डॉ. दत्ता ने आगे कहा कि प्रत्येक महाविद्यालय में किसी एक विषय को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने से इसको बेहतर ढंग से कार्यान्वित करने में मदद मिलेगी। आपने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर गठित इस स्वयं समितियों में महाविद्यालयों के प्राचार्य को भी शामिल किया जाना चाहिए। बैठक में डॉ. सचिन कुमार ने धन्यवाद किया।
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