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Meerut News: अति पिछड़ा सम्मेलन के बहाने 2027 की तैयारी
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सरूरपुर। कदम रिसोर्ट में सम्मेलन की तैयारी पर चर्चा करते रालोद पदाधिकारी। स्वयं
सिवालखास में रालोद साधेगा सियासी समीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
सरूरपुर। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सिवालखास में राष्ट्रीय लोक दल ने अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। शनिवार को सरूरपुर ब्लॉक स्थित कदम रिसॉर्ट में होने वाला अति पिछड़ा वर्ग सम्मेलन इसी रणनीति की कड़ी माना जा रहा है।
रालोद नेता सुनील रोहटा के आह्वान पर होने वाले सम्मेलन में अति पिछड़ा वर्ग के साथ किसान और युवाओं की भागीदारी पर जोर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सिवालखास सीट रालोद के खाते में गई थी। पार्टी प्रत्याशी गुलाम मोहम्मद ने भाजपा के मनिंदर पाल सिंह को 9,495 वोट से हराया था। अब अगले विधानसभा चुनाव से पहले अति पिछड़ा वर्ग को केंद्र में रखकर सम्मेलन करना रालोद की सामाजिक और सांगठनिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सम्मेलन में पार्टी की विचारधारा और नीतियों के साथ अति पिछड़े और वंचित वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया जाएगा। इसके साथ ही गांव-गांव संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां देने और चुनावी तैयारियों को धार देने पर चर्चा होगी। सिवालखास में रालोद के लिए 2022 की जीत की जमीन को बनाए रखना और व्यापक सामाजिक आधार तैयार करना बड़ी चुनौती है। ऐसे में सम्मेलन के जरिये पार्टी एक तरफ अति पिछड़ा वर्ग को साधने का संदेश देगी। वहीं दूसरी तरफ कार्यकर्ताओं को 2027 की चुनावी तैयारियों के लिए सक्रिय करने की कोशिश करेगी। सम्मेलन में भीड़ और भागीदारी के जरिये रालोद क्षेत्र में अपनी संगठनात्मक ताकत का संदेश देने की तैयारी में है।
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सरूरपुर। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सिवालखास में राष्ट्रीय लोक दल ने अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। शनिवार को सरूरपुर ब्लॉक स्थित कदम रिसॉर्ट में होने वाला अति पिछड़ा वर्ग सम्मेलन इसी रणनीति की कड़ी माना जा रहा है।
रालोद नेता सुनील रोहटा के आह्वान पर होने वाले सम्मेलन में अति पिछड़ा वर्ग के साथ किसान और युवाओं की भागीदारी पर जोर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सिवालखास सीट रालोद के खाते में गई थी। पार्टी प्रत्याशी गुलाम मोहम्मद ने भाजपा के मनिंदर पाल सिंह को 9,495 वोट से हराया था। अब अगले विधानसभा चुनाव से पहले अति पिछड़ा वर्ग को केंद्र में रखकर सम्मेलन करना रालोद की सामाजिक और सांगठनिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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सम्मेलन में पार्टी की विचारधारा और नीतियों के साथ अति पिछड़े और वंचित वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया जाएगा। इसके साथ ही गांव-गांव संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां देने और चुनावी तैयारियों को धार देने पर चर्चा होगी। सिवालखास में रालोद के लिए 2022 की जीत की जमीन को बनाए रखना और व्यापक सामाजिक आधार तैयार करना बड़ी चुनौती है। ऐसे में सम्मेलन के जरिये पार्टी एक तरफ अति पिछड़ा वर्ग को साधने का संदेश देगी। वहीं दूसरी तरफ कार्यकर्ताओं को 2027 की चुनावी तैयारियों के लिए सक्रिय करने की कोशिश करेगी। सम्मेलन में भीड़ और भागीदारी के जरिये रालोद क्षेत्र में अपनी संगठनात्मक ताकत का संदेश देने की तैयारी में है।
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