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बुढ़ाना में प्रवीण जैन की हत्या के बाद फैलाया था खौफ

Fri, 13 Sep 2019 02:45 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 13 Sep 2019 02:45 AM IST
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praveen jain death in budhana
बुढ़ाना में प्रवीण जैन की हत्या के बाद फैलाया था खौफ
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। मुठभेड़ में मारे गए बदमाश पंकज उर्फ बंटी ने रंगदारी न देने पर साल 2014 में बुढ़ाना में व्यापारी प्रवीण जैन की हत्या कर दी थी। जिसके बाद से बंटी का खौफ फैल गया था। बंटी की शहजाद से दोस्ती हो गई। विनोद बावला गैंग में दोनों बदमाश शामिल हो गए। जिसके बाद दोनों बदमाशों ने अपराध की दुनिया में पीछे मुड़कर नहीं देखा। मेरठ में भी वह वारदात करने आते थे।
सीओ दौराला जितेंद्र सरगम ने दोनों बदमाशों का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला। जिसमें जानकारी हुई कि पंकज और शहजाद ने रंगदारी, हत्या और लूटपाट करना पेशा बना लिया था। बुढ़ाना थाने में दोनों बदमाश हिस्ट्रीशीटरों की सूची में टॉप टेन थे। साल 2009 में कांधला में सराफा व्यापारी से 96 किलो चांदी लूटने के बाद दोनों बदमाश पुलिस की निगाह में आए थे। दोनों मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में व्यापारी से एक लाख रुपये की लूट में वांछित चल रहे थे। सीओ दौराला जितेंद्र सरगम साल 2009 से 2011 तक बुढ़ाना कोतवाली में इंस्पेक्टर रह चुके हैं, तभी से दोनों बदमाशों से परिचित थे। इन बदमाशों ने व्यापारी सुमित से साल 2015 में पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगी। इसके अलावा भी कई व्यापारियों को दोनों बदमाश जान से मारने की धमकी दे चुके थे। मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर और शामली में वह वारदात करते थे। पुलिस को शक न हो, इसको लेकर वह ट्रक चलाते थे। 21 जुलाई 2019 को मेरठ पुलिस द्वारा शहजाद व पंकज उर्फ बंटी पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया जा चुका था।
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दहशत में छोड़ा था बुढ़ाना
पुलिस के मुताबिक साल 2014 में व्यापारी प्रवीण जैन की हत्या के बाद परिवार दहशत में आया था। बुढ़ाना छोड़कर बड़ौत जाकर बस गया था। बंटी और शहजाद की मुठभेड़ में मौत होने के बारे में जानकारी लगते ही कई परिवारों ने राहत की सांस ली है। पुलिस दोनों अपराधियों के साथियों की तलाश में लगी है।
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छह में से तीन रह गए
मेरठ पुलिस के साथ मुठभेड़ में कस्बा निवासी शहजाद पुत्र सीदा की मौत हो गई। सीदा के छह बेटे थे। दो बेटे पहले बीमारी की भेंट चढ़ गए थे। तीसरा बेटा शहजाद भी पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया। इस परिवार में शहजाद के तीन भाई बचे हैं। यह परिवार मजदूरी करके अपना जीवनयापन करता है।
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