इस बार अधिकमास की पूर्णिमा के दिन सर्वार्थसिद्धि योग भी बन रहा है। पंचांग की गणना के अनुसार, एक अक्तूबर को पूर्णिमा तिथि अर्धरात्रि के बाद तक रहेगी। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में वृद्धि योग और सर्वार्थसिद्धि योग के साथ गुरुवार के दिन का संयोग बेहद प्रभावशाली है। शास्त्रीय मान्यता है कि पूर्णिमा का व्रत करने से समस्त सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है।
Adhik Maas Purnima 2020: सर्वार्थसिद्धि योग में आ रही पूर्णिमा, इन पांच राशि वालों का होगा फायदा
पूर्णिमा पंचांग के अनुसार, मास की 15वीं और शुक्लपक्ष की अंतिम तिथि है, जिस दिन चंद्रमा आकाश में पूरा होता है। अधिकमास की पूर्णिमा एक अक्तूबर को है। धार्मिक रूप से यह तिथि अपने आप में महत्वपूर्ण है। इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा, दान-पुण्य व पवित्र नदी में स्नान का विधान है। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि अधिकमास में किया गया जप, तप, व्रत और दान अक्षय फल देते हैं। लक्ष्मी स्तोत्र या कनक धारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। शास्त्रों में बताया गया है कि इन दोनों का पाठ करने से सभी तरह की ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त होती हैं और राजयोग प्राप्त होता है।
पुरुषोत्तम पूर्णिमा गुरुवार का संयोग
अधिकमास पूर्णिमा में भगवान विष्णु की सत्यनारायण की कथा करनी चाहिए। इस दिन भगवान नारायण का प्रिय वार गुरुवार का संयोग बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन कोशिश करें कि पीली वस्तुओं का दान करें। गुरुवार को यह दान आपकी कुंडली में गुरु को बलवान करेगा। केसर से तिलक और तुलसी पूजा करें। भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाएं और सूर्य को जल अर्पित करें।
सूर्य व चंद्र वर्ष के बीच का संतुलन है मलमास
अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और आठ घंटे के अंतर से आता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार, हर सूर्य वर्ष 365 दिन और छह घंटे का माना जाता है। वहीं, चंद्र वर्ष 365 दिनों का माना जाता है। यानी दोनों में करीब 11 दिनों का अंतर होता है, जो तीन वर्ष में एक माह के लगभग हो जाता है। इसी कारण इसे अधिकमास कहा जाता है।
अधिकमास में शनि भी हुए मार्गी
शनि ग्रह 142 दिन बाद 29 सितंबर को सुबह 10:30 बजे वक्री से मार्गी हो गए हैं। शनि के मार्गी होने से जिस राशि पर भी शनि का प्रभाव था, वह काफी हद तक कम हो जाएगा। शनि 11 मई 2020 को अपनी ही राशि मकर में वक्री हुए थे। इससे पहले 24 जनवरी को शनि ने धनु से मकर राशि में गोचर किया था। शनि का मार्गी होना एक बड़ी घटना है। शनि के मार्गी होने से मिथुन, कन्या, कर्क, धनु और वृश्चिक राशि वालों का फायदा हो सकता है। मार्गी होने पर जातकों के जीवन पर इसका प्रभाव सकारात्मक रूप से पड़ता है।
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