नकली सिगरेट फेक्टरी: चौकी प्रभारी-कांस्टेबल निलंबित; रवि किशोर सिर्फ मोहरा, मास्टरमाइंड की तलाश तेज
हस्तिनापुर के दूधली गांव में नकली सिगरेट फैक्टरी पकड़े जाने के मामले में एसएसपी ने चौकी प्रभारी और बीट कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है। पुलिस के मुताबिक रवि किशोर सिर्फ मोहरा है और करोड़ों के नेटवर्क के मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है।
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मेरठ के हस्तिनापुर में दूधली गांव में एक डिग्री कॉलेज की बिल्डिंग में पकड़ी गई नकली सिगरेट फैक्टरी के मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद एसएसपी ने बड़ी कार्रवाई की है। एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने इस मामले में जंबूद्वीप चौकी प्रभारी उप निरीक्षक शिवेंद्र कुमार और बीट कांस्टेबल उमेश कुमार को निलंबित कर दिया है।
दोनों पर क्षेत्र में अवैध गतिविधि की जानकारी और निगरानी को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप है। साथ ही सीओ मवाना को विभागीय जांच भी सौंपी है। दूधली गांव के खादर में कॉलेज भवन के अंदर आठ महीने से चल रही आईटीसी कंपनी की नकली सिगरेट फैक्टरी पकड़े जाने के बाद मूल बेंगलुरु व हाल दिल्ली निवासी रवि किशोर को पुलिस ने गिरफ्तार पर जेल भेज दिया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि रवि किशोर को सिर्फ मोहरा बनाया गया था।
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यह खेल कहीं ओर से चल रहा था। पुलिस को पूछताछ में उसने बताया कि नकली फैक्टरी वह स्वयं ही संचालित कर रहा था। परंतु पुलिस को मिले कई महत्वपूर्ण सबूतों के आधार पर इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क है जिसके तार पश्चिमी देश कंबोडिया तक जुड़े हैं।
पुलिस के सामने अब सवाल यह नहीं है कि फैक्टरी कौन चला रहा था, बल्कि यह है कि 10 करोड़ रुपये निवेश कर यह पूरा कारोबार आखिर कितने हाथों से होकर चल रहा था। आठ महीने में सिगरेट के करीब 40 करोड़ रुपये के बिक्री के आंकड़े इस पूरे खेल को स्थानीय स्तर के छोटे कारोबार से कहीं आगे ले जा रहे हैं।
नकली सिगरेट फैक्टरी के पीछे बड़ा नेटवर्क
पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस नेटवर्क की कई कड़ियां सामने आ रही हैं। पता चला है कि करीब एक वर्ष पहले कंबोडिया से भारत लाई गई मशीन को भारत पहुंचने में कंबोडिया निवासी हर्षद मेहता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बाद वह मशीन दिल्ली पहुंची और वहां से संचालक रवि किशोर व दिल्ली निवासी रवि कुमार की मदद से लगभग आठ महीने पहले हस्तिनापुर पहुंची।
इसके बाद खादर के सुनसान इलाके में स्थित कॉलेज भवन में उसका सेटअप तैयार किया गया और उत्पादन शुरू हो गया। पांच करोड़ रुपये का यह सेटअप जिसमें बड़ी-बड़ी चार मशीन व अन्य सामान को हस्तिनापुर तक पहुंचाने और उसे स्थापित कराने में कई अन्य लोग शामिल हैं।
पुलिस पूछताछ में मवाना थाना क्षेत्र के कॉल निवासी दीपक उर्फ बाबा, व तरुण का भी नाम सामने आया है। जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है। इस जांच में अभी कई और नाम जुड़ सकते हैं।
40 करोड़ की सिगरेट आखिर गई कहां : फैक्टरी से करीब तीन करोड़ रुपये का तैयार माल मिलने के बाद जांच में करीब 40 करोड़ रुपये की सिगरेट बाजार में खपाए जाने की बात सामने आई है। यही आंकड़ा इस मामले को और गंभीर बनाता है। यदि इतने बड़े पैमाने पर नकली सिगरेट बाजार में पहुंची तो निश्चित तौर पर इसके लिए खरीदार, बिचौलिये, परिवहन करने वाले और माल खपाने वाले बाजार भी रहे होंगे।
एसपी देहात अभिजीत कुमार के अनुसार, पुलिस की जांच में फैक्टरी संचालन से जुड़े करीब पांच लोगों के नाम सामने आए है। रवि किशोर तो मोहरा है, फैक्टरी मालिक कोई और है। जेल भेजे गए रवि किशोर से पूछताछ में दिल्ली निवासी रवि कुमार का भी नाम बताया है। वहीं इसके साथ-साथ तरुण और दीपक के नाम सामने आए हैं।
दीपक के पते का सत्यापन किया जा चुका है, जबकि तरुण के संबंध में पुलिस जानकारी जुटा रही है। जांच में सामने आया है कि यह पांच लोग ही पूरे नेटवर्क का हिस्सा नहीं थे। इनके पीछे भी कोई और चेहरा है। करोड़ों रुपये के निवेश और विदेशी मशीनरी को देखते हुए जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
फेक्टरी में पहुंची आईटीसी की टीम
रविवार को आईटीसी के प्रतिनिधि रिशु मिश्रा कंपनी की विधिक टीम और अधिवक्ताओं के साथ फैक्टरी पहुंचे। टीम ने मौके का निरीक्षण कर बरामद सामग्री और फैक्टरी से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई। टीम की ओर से मौके का नक्शा भी तैयार किया गया।
रिशु मिश्रा ने बताया कि रविवार को पुलिस को कुछ आरोपियों के नाम उपलब्ध कराए गए हैं। हालांकि, इन लोगों के बीच हुई बातचीत और संपर्कों की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। पुलिस संबंधित मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) आने का इंतजार कर रही है।