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Meerut News: गन्ने में दिखाई दे रहा पोक्का बोइंग रोग
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माछरा। क्षेत्र में इस बार गन्ने की फसल में पोक्का बोइंग रोग दिखाई दे रहा है, जिसे लेकर किसान चिंतित हैं।
माछरा और रजपुरा ब्लॉक क्षेत्र गन्ने की बंपर पैदावार के लिए पूरे मेरठ जनपद में प्रसिद्ध है। इस बार सही मानसून और उच्च आर्द्रता के कारण गन्ने की फसल पर फफूंद जनित रोग पोक्का बोइंग का प्रभाव देखने को मिल रहा है। यदि समय रहते किसान इस रोग की पहचान कर उचित प्रबंधन नहीं करता है तो गन्ने की पैदावार और रिकवरी दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलेगा क्योंकि पोक्का बोइंग रोग फफूंद के संक्रमण के कारण फैलता है। बारिश के मौसम में हवा में अधिक नमी होने के कारण और तापमान में वृद्धि इस फफूंद के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मानी जाती है। इस रोग में गन्ने की ऊपरी नई पत्तियों के आधार पर सफेद या हल्के पीले रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। धीरे-धीरे पत्तियां मुड़ने लगती हैं। झुर्रीदार हो जाती हैं और आपस में उलझकर चोटी जैसा रूप धारण कर लेती हैं।
एडीओ कृषि सुरेंद्र अधाना का कहना है कि पोक्का बोइंग रोग से निपटने के लिए किसान को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर गन्ना पत्तियों पर अच्छी प्रकार से छिड़काव करें। साथ ही खेत में पानी जमा न होने दें और संक्रमित पत्तियों को खेत से बाहर निकालकर नष्ट कर दें।
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माछरा और रजपुरा ब्लॉक क्षेत्र गन्ने की बंपर पैदावार के लिए पूरे मेरठ जनपद में प्रसिद्ध है। इस बार सही मानसून और उच्च आर्द्रता के कारण गन्ने की फसल पर फफूंद जनित रोग पोक्का बोइंग का प्रभाव देखने को मिल रहा है। यदि समय रहते किसान इस रोग की पहचान कर उचित प्रबंधन नहीं करता है तो गन्ने की पैदावार और रिकवरी दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलेगा क्योंकि पोक्का बोइंग रोग फफूंद के संक्रमण के कारण फैलता है। बारिश के मौसम में हवा में अधिक नमी होने के कारण और तापमान में वृद्धि इस फफूंद के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मानी जाती है। इस रोग में गन्ने की ऊपरी नई पत्तियों के आधार पर सफेद या हल्के पीले रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। धीरे-धीरे पत्तियां मुड़ने लगती हैं। झुर्रीदार हो जाती हैं और आपस में उलझकर चोटी जैसा रूप धारण कर लेती हैं।
एडीओ कृषि सुरेंद्र अधाना का कहना है कि पोक्का बोइंग रोग से निपटने के लिए किसान को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर गन्ना पत्तियों पर अच्छी प्रकार से छिड़काव करें। साथ ही खेत में पानी जमा न होने दें और संक्रमित पत्तियों को खेत से बाहर निकालकर नष्ट कर दें।
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