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यज्ञ से मनुष्य बनता है सुसंस्कृत
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खरखौदा। कस्बे में चार दिन से चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का आयोजन चल रहा है। महायज्ञ के चौथे दिन बुधवार को यज्ञ के बाद मंत्रों का ज्ञान कराया।
कस्बा खरखौदा में गुरूब्रह्म ऋषि कृष्णदत्त महाराज की प्रेरणा से पिछले छह वर्षों से राष्ट्रवादी कल्याण चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का आयोजन चल रहा है। जिसमें यज्ञ के चौथे दिन बुधवार को यज्ञोपरांत यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य गुरु वचन शास्त्री एवं आचार्य रविदत्त शास्त्री द्वारा प्रवचन में बताया मंत्रों में बहुत शक्ति के स्रोत दबे हैं। जिस प्रकार अमुक स्वर विन्यास से युक्त शब्दों की रचना करने से अनेक राग बजते हैं। उनको सुनने वालों पर विभिन्न प्रकार का प्रभाव होता है। उसी प्रकार मंत्रोच्चारा से विशिष्ट प्रकार की ध्वनि तरंगे निकलती हैं। उनका प्रभाव विश्वव्यापी प्रकृति, सूक्ष्म जगत तथा प्राणियों के स्थूल व सूक्ष्म शरीरों पड़ता है। यज्ञ की ऊष्मा मनुष्य के अंतकरण पर देवत्व की छाप डालती है। जहां यज्ञ होते हैं वहां भूमि एवं प्रदेश सुसंस्कारों की छाप अपने अंदर धारण कर लेता है। वहां जाने वालों पर दीर्घकाल तक प्रभाव पड़ता रहता है। जिन घरों में यज्ञ होते हैं वहां एक प्रकार का तीर्थ बन जाता है। वहां जिनका आगमन होता है उनकी मनोभूमि उच्च, सुविकसित, सुसंस्कृत बनती है। बच्चों को सुसंस्कारी बनाने के लिए यज्ञीय वातावरण की समीपता उपयोगी सिद्ध होती है। यज्ञ से मानसिक दोषों एवं दुर्गुणों का निष्कासन संभव है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष, कायरता, कामुकता, आलस्य, आवेश, संशय, मानसिक रोगों समेत सभी के लिए यज्ञ विश्वस्त पद्धति है। मंत्रोच्चार की ध्वनि कंपन, सुदूर क्षेत्र में बिखरकर लोगों का मानसिक परिष्कार करते हैं। अनेक प्रयोजनों के लिए अनेक कामनाओं की पूर्ति के लिए, अनेक विधानों के साथ, अनेक विशिष्ट यज्ञ भी किए जा सकते हैं। उसके समाधान के लिए यज्ञीय प्रक्रिया को पुनर्जीवित करना आज की स्थिति में और भी अधिक आवश्यक हो गया है। इस मौके पर एमएलसी प्रत्याशी सुनील त्यागी, सुमित शास्त्री, अजय शास्त्री, मनोज शर्मा, संगीत शर्मा, अभयदेव त्यागी, सुशील प्रजापति, मुकेश त्यागी, प्रदीप त्यागी, गोपी महाश्य, अवधेश स्वामी, देवेंद्र पहलवान, राजू त्यागी, दीपक त्यागी, बसंत त्यागी, मनीष त्यागी, मदन गिरि महाराज सहित कई लोग मौजूद रहे।
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कस्बा खरखौदा में गुरूब्रह्म ऋषि कृष्णदत्त महाराज की प्रेरणा से पिछले छह वर्षों से राष्ट्रवादी कल्याण चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का आयोजन चल रहा है। जिसमें यज्ञ के चौथे दिन बुधवार को यज्ञोपरांत यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य गुरु वचन शास्त्री एवं आचार्य रविदत्त शास्त्री द्वारा प्रवचन में बताया मंत्रों में बहुत शक्ति के स्रोत दबे हैं। जिस प्रकार अमुक स्वर विन्यास से युक्त शब्दों की रचना करने से अनेक राग बजते हैं। उनको सुनने वालों पर विभिन्न प्रकार का प्रभाव होता है। उसी प्रकार मंत्रोच्चारा से विशिष्ट प्रकार की ध्वनि तरंगे निकलती हैं। उनका प्रभाव विश्वव्यापी प्रकृति, सूक्ष्म जगत तथा प्राणियों के स्थूल व सूक्ष्म शरीरों पड़ता है। यज्ञ की ऊष्मा मनुष्य के अंतकरण पर देवत्व की छाप डालती है। जहां यज्ञ होते हैं वहां भूमि एवं प्रदेश सुसंस्कारों की छाप अपने अंदर धारण कर लेता है। वहां जाने वालों पर दीर्घकाल तक प्रभाव पड़ता रहता है। जिन घरों में यज्ञ होते हैं वहां एक प्रकार का तीर्थ बन जाता है। वहां जिनका आगमन होता है उनकी मनोभूमि उच्च, सुविकसित, सुसंस्कृत बनती है। बच्चों को सुसंस्कारी बनाने के लिए यज्ञीय वातावरण की समीपता उपयोगी सिद्ध होती है। यज्ञ से मानसिक दोषों एवं दुर्गुणों का निष्कासन संभव है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष, कायरता, कामुकता, आलस्य, आवेश, संशय, मानसिक रोगों समेत सभी के लिए यज्ञ विश्वस्त पद्धति है। मंत्रोच्चार की ध्वनि कंपन, सुदूर क्षेत्र में बिखरकर लोगों का मानसिक परिष्कार करते हैं। अनेक प्रयोजनों के लिए अनेक कामनाओं की पूर्ति के लिए, अनेक विधानों के साथ, अनेक विशिष्ट यज्ञ भी किए जा सकते हैं। उसके समाधान के लिए यज्ञीय प्रक्रिया को पुनर्जीवित करना आज की स्थिति में और भी अधिक आवश्यक हो गया है। इस मौके पर एमएलसी प्रत्याशी सुनील त्यागी, सुमित शास्त्री, अजय शास्त्री, मनोज शर्मा, संगीत शर्मा, अभयदेव त्यागी, सुशील प्रजापति, मुकेश त्यागी, प्रदीप त्यागी, गोपी महाश्य, अवधेश स्वामी, देवेंद्र पहलवान, राजू त्यागी, दीपक त्यागी, बसंत त्यागी, मनीष त्यागी, मदन गिरि महाराज सहित कई लोग मौजूद रहे।