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सुसाइड का विचार करने वाले लोगों का दिमाग नहीं होता नियंत्रित : चारु दहिया
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- सीसीएसयू छात्रावास में आयोजित किया गया सेमिनार
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। आत्महत्या आज विश्व में मृत्यु का चौथा बड़ा कारण है। विश्व में हर साल एक बड़ी संख्या में लोग आत्महत्या करते हैं, जिनमें युवाओं का प्रतिशत सबसे ज्यादा होता है। देश में ज्यादातर पुरुषों पर हर वक्त अच्छी नौकरी पाने और सक्सेस जल्दी होने का दबाव होता है। यह बात सोमवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पंडित दीनदयाल उपाध्याय छात्रावास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता काउंसिलिंग साइकोलॉजिस्ट चारु दहिया ने कही।
उन्होंने कहा कि अगर जिंदगी में समस्याएं हैं तो उनके समाधान शेयर करने से होते हैं, अगर मन मे रोना आता है तो वे रो सकते हैं। इससे हम नकारात्मक विचारों और इमोशंस से बचाव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में किसी बजह से आत्महत्या जैसे विचार ज्यादा आते हैं तो ऐसे लोगों का दिमाग खुद के नियंत्रण में नहीं होता, जिस वजह से वह खुद को नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार कर बैठते हैं। आज हमारे समाज में आत्महत्या को लेकर कई मत हैं जैसे कि जो कहते हैं वो आत्महत्या नहीं करते पर सुशांत सिंह जैसे लोगों ने पहले से ही संकेत दे दिए थे कि वह बहुत तकलीफ में है और उसे मदद चाहिए जो कि उसने एक फोटो के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया था। पर किसी ने उन संकेतों को नहीं पहचाना। उन्होंने कहा कि यह करके हम कई जिंदगियां बचा सकते हैं। प्रो. संजय कुमार ने बताया कि एनसीआरबी के अनुसार वर्ष 2022 में लगभग 13 हजार विद्यार्थियों ने आत्महत्या की थी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को आत्महत्या जैसे विचार बार बार आते हैं तो और उससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो वे विश्वविद्यालय स्थित साइकोलॉजिकल काउंसलिंग सेंटर में निःशुल्क संपर्क कर सकते हैं। अगर कोई चाहे तो वे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर न्यूज एंड इवेंट सेक्शन में 9 सितंबर को डाले गए लिंक से आत्महत्या के विचारों और डिप्रेशन का मापन भी कर सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। आत्महत्या आज विश्व में मृत्यु का चौथा बड़ा कारण है। विश्व में हर साल एक बड़ी संख्या में लोग आत्महत्या करते हैं, जिनमें युवाओं का प्रतिशत सबसे ज्यादा होता है। देश में ज्यादातर पुरुषों पर हर वक्त अच्छी नौकरी पाने और सक्सेस जल्दी होने का दबाव होता है। यह बात सोमवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पंडित दीनदयाल उपाध्याय छात्रावास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता काउंसिलिंग साइकोलॉजिस्ट चारु दहिया ने कही।
उन्होंने कहा कि अगर जिंदगी में समस्याएं हैं तो उनके समाधान शेयर करने से होते हैं, अगर मन मे रोना आता है तो वे रो सकते हैं। इससे हम नकारात्मक विचारों और इमोशंस से बचाव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में किसी बजह से आत्महत्या जैसे विचार ज्यादा आते हैं तो ऐसे लोगों का दिमाग खुद के नियंत्रण में नहीं होता, जिस वजह से वह खुद को नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार कर बैठते हैं। आज हमारे समाज में आत्महत्या को लेकर कई मत हैं जैसे कि जो कहते हैं वो आत्महत्या नहीं करते पर सुशांत सिंह जैसे लोगों ने पहले से ही संकेत दे दिए थे कि वह बहुत तकलीफ में है और उसे मदद चाहिए जो कि उसने एक फोटो के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया था। पर किसी ने उन संकेतों को नहीं पहचाना। उन्होंने कहा कि यह करके हम कई जिंदगियां बचा सकते हैं। प्रो. संजय कुमार ने बताया कि एनसीआरबी के अनुसार वर्ष 2022 में लगभग 13 हजार विद्यार्थियों ने आत्महत्या की थी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को आत्महत्या जैसे विचार बार बार आते हैं तो और उससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो वे विश्वविद्यालय स्थित साइकोलॉजिकल काउंसलिंग सेंटर में निःशुल्क संपर्क कर सकते हैं। अगर कोई चाहे तो वे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर न्यूज एंड इवेंट सेक्शन में 9 सितंबर को डाले गए लिंक से आत्महत्या के विचारों और डिप्रेशन का मापन भी कर सकते हैं।
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