गुस्से में अपनी ही जान के दुश्मन बन रहे लोग, मासूमों की हत्या में भी नहीं कांप रहे हाथ
- - मानसिक तनाव को भी आत्महत्या की बड़ी वजह मान रहे चिकित्सक
- - 48 लोगाें ने एक साल के अंदर जिले में की है आत्महत्या
- - 09 लोगों ने की है पिछले पांच महीने में आत्महत्या, इनमें पांच महिलाएं भी शामिल
विस्तार
आंकड़ों पर गौर करें तो एक साल में जिले में 48 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। जबकि पिछले पांच महीने में नौ लोगों ने आत्महत्या की है। इनमें पांच महिलाएं शामिल हैं। कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में इस तरह के मामलों में इजाफा हुआ है।
जिले में एक साल के अंदर 48 लोगों ने आत्महत्या की है। इनमें किसी ने जहर खाकर तो किसी ने फांसी लगाकर जान दी है। जिले में महिलाओं ने खुद आत्महत्या करने से पहले अपने बच्चों की हत्या करना शुरू कर दिया।
सात अगस्त को नजीबाबाद के गांव सौपुरी निवासी पप्पू की पत्नी लक्ष्मी ने पति से विवाद होने पर अपने पांच साल के बेटे आनंद, सात साल के बेटे मानव की पहले गला घोंटकर हत्या की और फिर खुद फांसी के फंदे पर लटक गई।
सुनीता पति से झगड़ने के बाद घर से निकली थी। 23 अगस्त को नांगल थाने के गांव तिसोतरा के जंगल में राजेश फांसी के फंदे पर झूल गया था। पत्नी पहले अन्य लोगों पर हत्या करने का आरोप लगाती रही। बाद में पुलिस की जांच में सामने आया कि राजेश ने फंसी लगाकर आत्महत्या की थी।
घरों के विवाद को आपस में निपटाएं : एसपी
एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह के मुताबिक सामंजस्य व विश्वास के अभाव में लोग खुदकशी जैसे कदम उठा रहे हैं। जरा से गुस्से को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। पति पत्नी में विवाद होने पर भी खुदकशी की जा रही है।
ऐसे विवादों को आपस में निपटाया जा सकता है। परिवार के लोग भी विवाद से बचें। लॉकडाउन के दौरान घरों में रहने से लोगों के बीच गुस्सा बढ़ा है। पति-पत्नी में व परिवार के अन्य लोगों में तकरार होती रहती है। ऐसे मामलों को लोगों को दिल से नहीं लेना चाहिए।
घरों में अकेले नहीं रहें : डॉ. राधेश्याम
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राधेश्याम वर्मा के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान लोग घर में खाली रहे हैं, परिजनों से कलह होती रही है। गुस्सा बर्दाश्त न होने पर लोग यह कदम उठा रहे हैं।
लोग घरों में अकेले न रहें और किसी विवाद को दिल पर न लें। परिवार के लोग आपस में एक साथ रहें। अगर कहीं विवाद हो जाता है तो उसे हंस कर टाल दें। गुस्से को टालने की आदत बनानी चाहिए। गुस्से में लोग कोई भी गलत कदम उठा लेते हैं।
गुस्से का टालें बच्चों के साथ खेले: डॉ. सौरभ
मनोचिकित्सक डॉ. सौरभ गुप्ता के मुताबिक लोगों का काम छूटने पर वे मौत को गले लगा रहे हैं। लोग घरों में खाली नहीं रहें। कोई भी काम करते रहें। सब के साथ समय बिताएं। कोई गुस्सा आने पर उसे टाल दें। जान देने जैसी बात दिमाग में न लाएं। अपने तनाव को कम करने के लिए बच्चों के साथ खेलें व टीवी पर मनोरंजन का सहारा लें। कोई भी परेशानी होने पर अपने मन की बात परिजनों से साझा करें।