लोग जिंदगी से मुंह मोड़ रहे हैं। गृह क्लेश और नौकरी जाने के तनाव के कारण अपनी जान दे रहे हैं। पिछले एक माह का आंकड़ा बहुत ही चौंकाने वाला है। औसतन प्रतिदिन एक व्यक्ति ने जिंदगी के बजाए मौत का रास्ता चुना। 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच के आंकड़े देखें तो इस दौरान शहर में 10 हत्याएं हुईं, 22 लोगों की जान हादसों में गईं। आत्महत्या करने वालों की संख्या 30 से भी ज्यादा है।
चौंकाने वाले आंकड़े: एक महीने में 30 से ज्यादा लोगों ने चुनी मौत, अधूरे छोड़ गए सपने, ये रहे बड़े मामले
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खुदकुशी से पहले सुसाइड नोट छोड़ना या फिर मौत से पहले वीडियो लाइव अपलोड किए जा रहे हैं। मेरठ में एक के बाद एक आत्महत्या के केस हो रहे हैं। गंगानगर के ईशापुरम में अधिवक्ता ओमकार सिंह ने 13 फरवरी को फांसी लगाकर जान दी थी। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई और सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। इसको लेकर खूब बखेड़ा हुआ। नतीजा यह हुआ 18 फरवरी को अधिवक्ता की मौत के मामले में नामजद संजय मोतला ने भी दादरी दौराला में अपने गांव में फांसी लगाकर जान दे दी। आरोप तो पुलिस पर भी था, उसकी पत्नी भाभी और मां को हिरासत में ले लिया, जिसके चलते वह परेशान था।
कुछ चर्चित मामले
केस 1
टीपी नगर थाना क्षेत्र के भोला रोड स्थित शिव कुंज निवासी अमित चौधरी ने हाईवे के एक होटल पर 12 मार्च खुदकुशी कर ली। आरोप विद्या प्रकाशन के मालिक, तीन कर्मचारी यशपाल मलिक नेहा गौतम व गौरव महेश्वरी पर लगाया। मरने से पहले वीडियो बनाया और फिर उसको फेसबुक पर अपलोड भी कर दिया।
केस 2
14 मार्च को कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में युवक ने जहर खाकर जान दे दी। बेटे के वियोग में बीमार पिता की भी दूसरे दिन मौत हो गई। पुलिस ने बताया है कि दोनों पिता-पुत्र की मानसिक स्थिति कमजोर हो गई थी। मौत को लेकर स्थानीय लोगों में भी अलग-अलग चर्चाएं रहीं। मौत के बाद परिवार और रिश्तेदारों में भी दूरियां बनाई।
केस 3
ब्रह्मपुरी में 11 मार्च को सविता नाम की युवती ने फांसी लगाकर जान दे दी। युवती से मनचलों ने छेड़छाड़ कर दी थी, इसी बात पर उसने जान दे दी। हालांकि पुलिस ने युवती की मौत के बाद पिता-पुत्र समेत तीन लोगों को जेल भेजा। बेटी की मौत के बाद मां बीमार हो गई व तभी से हॉस्पिटल में भर्ती है।
केस 4
शास्त्री नगर स्थित पीवीएस मॉल के पास होटल में प्रेमी युगल ने जहर खाकर जान दे दी। दोनों की मोहब्बत का विरोध सार्वजनिक नहीं हुआ है। फिर भी न जाने किस परिस्थिति में दोनों ने मौत को चुना है।
लोगों को समझाने की जरूरत
हत्या और हादसे से ज्यादा खुदकुशी के मामले बढ़े हैं। अधिकांश पारिवारिक विवाद में लोगों ने जान दी है। पुलिस ने हत्या हादसे के साथ आत्महत्या का रिकॉर्ड थानों में दर्ज किया है। रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाती है। सामाजिक स्तर पर लोगों को समझाने की जरूरत है। - अजय साहनी, एसएसपी
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