फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   parijan bole thanedar ne kiya utpidan

परिजन बोले, थानेदार ने किया उत्पीड़न

Sat, 02 Feb 2019 01:54 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Sat, 02 Feb 2019 01:54 AM IST
विज्ञापन
parijan bole thanedar ne kiya utpidan
meerut - फोटो : meerut
 
विज्ञापन


 देवबंद में तैनात प्रशिक्षु दरोगा कुलदीप सिंह की मौत पर उनके परिजनोें में जबरदस्त गुस्सा है। आरोप है कि दरोगा का थानेदार ने उत्पीड़न किया। इसके चलते उसने आत्महत्या की। परिजन बोले, आरोपियों को सजा दिलाने की बजाए पुलिस अधिकारी उनको बचाने में लगे हैं।
श्रद्धापुरी स्थित आवास पर प्रशिक्षु दरोगा कुलदीप सिंह की पत्नी शिल्पी व उसके पिता अशोक सिंह, भाई संदीप सिंह ने रणखंडी सहारनपुर थानेदार अभिषेक सिरोही पर आरोप लगाए। शिल्पी ने कहा कि कुलदीप अंडर ट्रेनिंग थे। इसके बावजूद थानेदार अभिषेक सिरोही ने उन्हें रणखंडी चौकी का प्रभारी बना दिया। उन्हें विवेचनाओं का निपटारा करने की जानकारी नहीं थी। फिर भी 50 से अधिक लंबित विवेचनाएं थमा दी गईं। गलती होने पर थानेदार अपमानित करते थे। आत्महत्या से पूर्व कुलदीप ने जो दो ऑडियो मैसेज बच्चों के नाम परिजनों को भेजे, उनमें बातों से साफ जाहिर हो रहा है कि उस पर काम का अत्यधिक बोझ था। पिता अशोक सिंह का कहना है कि वह इस मामले में सहारनपुर एसएसपी दिनेश कुमार से मिले। लेकिन एसएसपी ने कार्रवाई का आश्वासन तक नहीं दिया। सिर्फ इतना कहा कि मामले की जांच सीओ को सौंपी है। पिता ने आरोप लगाया कि अधिकारी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
विज्ञापन


...छिन गई जाने क्यों मेरी आजादी
दरोगा
कुलदीप सिंह ने जो ऑडियो मैसेज परिजनों को भेजा। वह कुछ इस तरह है। आस लगाई जिनसे, उन्हीं ने रुसवा किया। प्यार के नाम पर महफिल में रुसवा किया। चांद सितारों की ख्वाहिश थी, लेकिन नसीब में कांटें ही थे। मेहनतकश बहुत थे, लेकिन यारों जिंदगी में फांकी ही थे। मैं जीतकर भी हारा और सारा जहां जीत गया। सुर्खियां बटोरती आज मेरी बर्बादी, छिन गई जाने क्यों मेरी आजादी। तरकस के तीर बुझ गए, शैय्या में मेरी कुंज गए। हौसले दरख्तों से झांकते गए, धूल जिंदगी की फांकते गए। झांक गए हम दीवारों से, हार गए इन सिपेहसलारों से। एसएचओ शब्दकोश का अंत यही है, रात में तारे नहीं हैं। बुझा-बुझा सा जीवन है, बर्बादी की झांकी अब तो यौवन है। अगर रुठे तो कैसे मनाऊं, बहुत है उनकी आबादी। सुर्खियां बटोरती मेरी बर्बादी, छिन गई जाने क्यों मेरी आजादी।
विज्ञापन
विज्ञापन




मैं मानसिक तनाव में हूं, मेरे बच्चों का ख्याल रखना
फांसी
लगाकर आत्महत्या करने से पहले उपनिरीक्षक कुलदीप सिंह ने अपने मोबाइल फोन में दो ऑडियो रिकार्ड किए थे। एक बयान में हिन्दी में तो दूसरा अंग्रेजी में है। दोनों ही ऑडियो में कुलदीप ने कहा कि मैं टूट चुका हूं। जब से पुलिस स्टेशन ज्वाइन किया है, तभी से टार्चर हो रहा हूं। अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं है। मैं आत्महत्या कर रहा हूं। मुझे दुख है कि मैं अपनी पत्नी और बच्चों के लिए कुछ नहीं कर सका। मेरे बाद मेरे बच्चों का ख्याल रखना।   
रिकॉर्ड किया गया ऑडियो पुलिस क्षेत्राधिकारी को संबोधित किया गया है। कुलदीप ने ऑडियो में रोते हुए कहा है कि उन्हें सिखाने की बजाय उन पर काम का बोझ डाल दिया गया। जब से पुलिस स्टेशन ज्वाइन किया तभी से प्रताड़ित किया जा रहा है। मैं इतनी हिम्मत नहीं कर पा रहा हूं कि आपका सामना कर सकूं। मैं पूरी तरह से टूट चुका हूं। अब मुझे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।  
ऑडियो में कहा कि शायद वह इस प्रोफेशन के लिए नहीं था। वह अच्छा लेखक है, अच्छा कवि है। 70 से अधिक कविताएं प्रकाशित भी हो चुकी हैं। बड़ी मुश्किल से नौकरी ली थी, लेकिन अपना सम्मान नहीं गिरा सकता। अब बच्चों का मोह भी मेरे आत्म सम्मान पर भारी पड़ रहा है। ऑडियो में कुलदीप ने कहा कि उसके बाद उसके परिवार के लिए कुछ ऐसी व्यवस्था कर देना, जिससे वह परेशान न हों। यह मेरा अंतिम स्टेटमेंट है।  

पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल
इस
मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, केवल इसीलिए ताकि कोई भी मेरे जैसा गलत कदम न उठाए। पुलिस व्यवस्था में सुधार आ जाए। पुलिस वाले घुट-घुटकर मर रहे हैं। जो पुलिसकर्मी पूर्व में मर चुके हैं, उनके परिवार से भी मेरी हमदर्दी है।
मेरे पति को मारा गया है : शिल्पी
कुलदीप सिंह की पत्नी शिल्पी ने कुलदीप की मौत को हत्या बताया है। शिल्पी ने आरोप लगाया कि उसके पति को प्रताड़ित किया जा रहा था। थानाध्यक्ष गाली गलौज कर रहे थे। सही काम में भी प्रताड़ित कर रहे थे। घर जाने के लिए छुट्टी तक नहीं दी जाती थी। उन्हें नौकरी से निकलवाने की धमकी दे रहे थे। कहते थे कि उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर कर देंगे। इस बारे में कुलदीप घर पर खुलकर नहीं बता पा रहे थे।
सुसाइड नोट भी लिखकर छोड़ा था  
ऑडियो में कुलदीप कहता है कि लाल रजिस्टर में मैने अपनी जीवनी लिखी है। उस रजिस्टर के आखिरी पन्ने पर सुसाइड नोट भी दो दिन पूर्व ही लिखा था। वह रजिस्टर एक सिपाही ने देख भी लिया था। कुलदीप ने बोला कि उसकी अलमारी में एक लाल रजिस्टर रखा है। जिसमें उसकी जीवनी लिखी है कि उसने कितना संघर्ष किया है।

उपनिरीक्षक कुलदीप सिंह की मौत के मामले में एसपी देहात जांच कर रहे हैं। अभी तक की जांच में ऑडियो रिकार्डिंग बयान के अनुसार मानसिक उत्पीड़न का आरोप सामने आया है। अन्य पुलिसकर्मी भी ड्यूटी कर रहे हैं। काम काफी होता है, लेकिन मानसिक उत्पीड़न के बारे में किसी पुलिसकर्मी ने शिकायत नहीं की। मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। --- दिनेश कुमार, एसएसपी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed