फलावदा। कस्बे में कुतुब शाह जमालुद्दीन की याद में चल रहे ऑल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया। उद्घाटन संयुक्त रूप से अतिथियों ने फीता काटकर किया।
ऑल इंडिया मुशायरे में मशहूर शायरों ने अपने कलाम पेश कर समा बांधा। मुशायरे की शुरुआत नाते पाक से की गई। वारिस वारसी ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा अपनी आंखों के समंदर में उतर जाने दे, आज की रात इस तरह गुजर जाने दे। मिर्जा हसीमुद्दीन हमदम ने पड़ा जिंदगी ने तो मौत की दहलीज पर पहुंचा दिया, मिलने वाले मेरे जीने की दुआ करते रहे। अरशद जिया ने इंसानियत की मिसाल देते हुए कहा आबे जमजम और यह गंगा रहने दो, मंदिरों, मस्जिद रोज का दंगा रहने दो, दूर ही रखो तुम नफरत की चिंगारी को, घर की छत पर तुम एक तिरंगा रहने दो। खलील अहमद खलील ने पढ़ा कि कानून तुम्हारा है तो मुंसिफ भी तुम्हारा, तुम कत्ल करो शौक से किस बात का डर है। खुर्शीद हैदर ने तजकरा हम ने सरेआम किया हो तो बता, नाम तेरा कहीं बदनाम किया हो तो बता। मोहम्मद अहमद ने पढ़ा कि पहले नजरों के तीर वह दिल पर चलाएगा, फिर हाले दिल पूछ के वह मुस्कुराएगा। आशिक महलका ने कहा कि तपते सहरा को भी गुलजार बनाया हमने, उनको मजबूर से मुख्तार बनाया हमने। मजहर सियानवी ने पढ़ा कि जिस देश में रहते हैं वो जन्नत है हमारी, हमें लंदन व लाहौर से क्या लेना। मुशायरे के संयोजक मिर्जा हसीमुद्दीन हमदम, अनवारुल हक शारदा, फैयाज नादिर तथा संचालन आशिक महलका ने किया। इस मौके पर चेयरमैन अब्दुस समद, पूर्व चेयरमैन सैयद मेराजुद्दीन, नैयर आलम, शफीक मिर्जा, सैयद ईसा, सपा नेता सैयद रिहानुद्दीन ,मेला सदर नफीस राजा अंसारी, नयब सदर नईम मनवर कुरैशी आदि मौजूद रहे।