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निजीकरण का विरोध: हड़ताल से भांजे के उपचार के लिए नहीं मिले रुपये, भटकता रहा मामा

Tue, 29 Mar 2022 11:21 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 29 Mar 2022 11:21 AM IST
सार

ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर निजीकरण के विरोध में सोमवार को बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल रखी।

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Opposition to privatization: Did not get money for treatment of nephew due to strike, uncle kept wandering
meerut news - फोटो : amar ujala

विस्तार

ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर निजीकरण के विरोध में सोमवार को बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल रखी। इस कारण खाताधारकों को परेशानी उठानी पड़ी। किसी को भांजे के उपचार के लिए रुपये निकालने थे तो किसी को छात्रवृत्ति के रुपये निकालने थे, लेकिन बैंक में काम नहीं होने से परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि कुछ बैंकों में मैनेजर व अन्य अधिकारियों ने कार्य किया, लेकिन इसके बावजूद जिलेभर में करीब एक करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। 

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बैंकों के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने सोमवार से दो दिवसीय हड़ताल शुरू की। इस हड़ताल से स्टेट बैंक के कर्मचारी बाहर रहे। अन्य बैंकों में कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने के कारण मैनेजर व अधिकारियों ने कार्य किया। इसके बावजूद अन्य बैंकों में लेनदेन काफी प्रभावित हुआ।
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यूएफबीयू के संयोजक विक्रम सिंह आर्य व बैंक कर्मचारी एसोसिएशन के प्रदेश सहायक सचिव सत्यपाल सिंह ने बताया कि सरकार बैंकों में भर्तियां नहीं कर रही हैं। संविदा पर कर्मचारी रखकर उनका शोषण कर रही है। स्टाफ की कमी के कारण एनपीए खाताधारकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस कारण बैंकों का डिपॉजिट लोन अनुपात असंतुलित हो गया है। कहा कि बैंकों का निजीकरण रोककर उनको ज्यादा सशक्त बनाने की जरूरत है। 
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इस दौरान बागपत में बिजेंद्र कुमार, धीरज शर्मा, प्रवेश, महेंद्र सिंह, सुशील, नरेंद्र सिंह, अजय कुमार, अमित शर्मा, श्रीओम व बड़ौत में सचिन कुमार, भूपेन्द्र, राजकुमार, अर्जुन सिंह, अनुज , दीपक, गणेश, नीरज कुमार, राम, देवेंद्र, धीर सिंह तोमर आदि मौजूद रहे।

बैंक कर्मचारियों की हड़ताल थी, जिससे करीब एक करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है। लेकिन अधिकतर बैंकों में मैनेजर व अन्य अधिकारियों ने खुद व्यवस्था संभाली थी। इस तरह ही दूसरे दिन भी कार्य किया जाएगा। - राजेश पंत, एलडीएम

खाताधारकों को उठानी पड़ी परेशानी, रुपये नहीं मिल सके
संतोषपुर के रहने वाले जगत सिंह ने बताया कि उनका भांजा योगेश बीमार है, जिसके उपचार के लिए रुपये निकालने केनरा बैंक में गए थे। दो दिन की हड़ताल होने की बात कही गई। नया गांव की रहने वाली बबीता ने बताया कि उसे छात्रवृत्ति के रुपये निकालने थे, लेकिन हड़ताल के कारण परेशानी झेलनी पड़ी।

बड़ौली गांव के किसान राजबीर फसल में खाद आदि डालने के लिए खरीदने को दस हजार रुपये निकालने बैंक पर आए थे, लेकिन निराश लौटे। बड़ौत की रहने वाली ममता ने बताया कि घर का राशन खरीदने के लिए रुपयों की जरूरत थी। बैंक में आने पर पता चला कि हड़ताल है।

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