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Meerut News: अधिवक्ता अधिनियम संशोधन बिल का विरोध
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मवाना। बार एसोसिएशन ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम प्रतीक्षा सिंह को ज्ञापन देते हुए विरोध जताया है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा अधिवक्ता अधिनियम संशोधन बिल 2025 को अधिवक्ता विरोधी होना बताते हुए अविलंब वापस लेने की मांग की है।
ज्ञापन में बार एसोसिएशन ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अधिवक्ता अधिनियम संशोधन बिल को पास करने से पूर्व उसमें किए गए संशोधनों के लिए देश के सभी अधिवक्ताओं से सुझाव, राय मांगी गई है। केंद्र सरकार द्वारा अधिवक्ता अधिनियम में जो संशोधन किए गए हैं, वो पूर्णत: अधिवक्ता विरोधी व सरकार की अधिवक्ता विरोधी दमनकारी नीति की ओर इशारा करते हैं। क्योंकि अधिवक्ता ही सरकार की गलत नीतियों एवं निर्णय के विरोध में वादकारियों के माध्यम से पीआईएल आदि के माध्यम से सक्षम न्यायालय में वाद योजित करते हैं। इसी को रोकने के उद्देश्य से उपरोक्त बिल में अधिवक्ताओं के अधिकारों का शोषण करने के उद्देश्य से अनेक संशोधन किए हैं।
अधिवक्ताओं को अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए की जाने वाली हड़ताल पर पूर्णत: रोक लगाई गई है, जो कि विधि विरुद्ध है। यदि कोई भी झूठा प्रार्थना पत्र अधिवक्ता के विरुद्ध देता है तो उसमें अधिवक्ता पर तीन लाख रुपये का जुर्माना तथा अन्य प्रावधान हैं। ज्ञापन में अधिवक्ता विरोधी इस बिल को अविलंब वापस लेने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में महामंत्री मुकेश त्यागी, श्रीबल्लभ एडवोकेट, विजय शर्मा एडवोकेट, हेमंत गुप्ता एडवोकेट, रामकृष्ण यादव एडवोकेट, शमसुद्दीन अंसारी, आशू गोयल एडवोकेट आदि काफी संख्या में थे।
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ज्ञापन में बार एसोसिएशन ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अधिवक्ता अधिनियम संशोधन बिल को पास करने से पूर्व उसमें किए गए संशोधनों के लिए देश के सभी अधिवक्ताओं से सुझाव, राय मांगी गई है। केंद्र सरकार द्वारा अधिवक्ता अधिनियम में जो संशोधन किए गए हैं, वो पूर्णत: अधिवक्ता विरोधी व सरकार की अधिवक्ता विरोधी दमनकारी नीति की ओर इशारा करते हैं। क्योंकि अधिवक्ता ही सरकार की गलत नीतियों एवं निर्णय के विरोध में वादकारियों के माध्यम से पीआईएल आदि के माध्यम से सक्षम न्यायालय में वाद योजित करते हैं। इसी को रोकने के उद्देश्य से उपरोक्त बिल में अधिवक्ताओं के अधिकारों का शोषण करने के उद्देश्य से अनेक संशोधन किए हैं।
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अधिवक्ताओं को अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए की जाने वाली हड़ताल पर पूर्णत: रोक लगाई गई है, जो कि विधि विरुद्ध है। यदि कोई भी झूठा प्रार्थना पत्र अधिवक्ता के विरुद्ध देता है तो उसमें अधिवक्ता पर तीन लाख रुपये का जुर्माना तथा अन्य प्रावधान हैं। ज्ञापन में अधिवक्ता विरोधी इस बिल को अविलंब वापस लेने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में महामंत्री मुकेश त्यागी, श्रीबल्लभ एडवोकेट, विजय शर्मा एडवोकेट, हेमंत गुप्ता एडवोकेट, रामकृष्ण यादव एडवोकेट, शमसुद्दीन अंसारी, आशू गोयल एडवोकेट आदि काफी संख्या में थे।
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