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Meerut News: जांच और शुरुआती पहचान से ही हेपेटाइटिस में बचेगी जान
Mon, 29 Jul 2024 02:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 29 Jul 2024 02:39 AM IST
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सहारनपुर। राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया गया। इसके माध्यम से लोगों को हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई संक्रामक रोगों के प्रति जागरूक किया। साथ ही बताया कि जांच और शुरुआती पहचान में ही हेपेटाइटिस बीमारी से जान बचेगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने एसबीडी जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस की जांच और उपचार के लिए ट्रीटमेंट सेंटर बना है। हेपेटाइटिस जांच, निदान और उपचार का लाभ देने के उद्देश्य से शिविर भी लगाया जाता है। नोडल अधिकारी शिवांका गौड़ ने बताया कि हेपेटाइटिस लीवर की एक गंभीर बीमारी है, जो पांच प्रकार के वायरस से फैलती है। बैक्टीरिया या परजीवी के कारण हो सकती है। हेपेटाइटिस बी में शुरुआती संक्रमण के 12 सप्ताह बाद पीलिया की शुरुआत होती है।
हेपेटाइटिस ए और ई दूसरों के मुकाबले कम खतरनाक होते है। हेपेटाइटिस बी, सी और डी लीवर को अधिक हानि पहुंचाते हैं। यह संक्रामक बीमारी लापरवाही बरतने पर एक से दूसरे व्यक्ति में फैलकर जानलेवा भी हो सकती है। हेपेटाइटिस दूषित भोजन, पानी, संक्रमित व्यक्ति के खून, अल्कोहल का अधिक सेवन, दवाओं के साइड इफेक्ट, एक से अधिक बार प्रयोग की गई इंजेक्शन सीरिंज के चलते हो सकता है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने एसबीडी जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस की जांच और उपचार के लिए ट्रीटमेंट सेंटर बना है। हेपेटाइटिस जांच, निदान और उपचार का लाभ देने के उद्देश्य से शिविर भी लगाया जाता है। नोडल अधिकारी शिवांका गौड़ ने बताया कि हेपेटाइटिस लीवर की एक गंभीर बीमारी है, जो पांच प्रकार के वायरस से फैलती है। बैक्टीरिया या परजीवी के कारण हो सकती है। हेपेटाइटिस बी में शुरुआती संक्रमण के 12 सप्ताह बाद पीलिया की शुरुआत होती है।
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हेपेटाइटिस ए और ई दूसरों के मुकाबले कम खतरनाक होते है। हेपेटाइटिस बी, सी और डी लीवर को अधिक हानि पहुंचाते हैं। यह संक्रामक बीमारी लापरवाही बरतने पर एक से दूसरे व्यक्ति में फैलकर जानलेवा भी हो सकती है। हेपेटाइटिस दूषित भोजन, पानी, संक्रमित व्यक्ति के खून, अल्कोहल का अधिक सेवन, दवाओं के साइड इफेक्ट, एक से अधिक बार प्रयोग की गई इंजेक्शन सीरिंज के चलते हो सकता है।
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