सूरत-ए-हाल: केवल पांच प्रतिशत लाभार्थी ही हुए ‘आयुष्मान’ 19 हजार से ज्यादा के नहीं बने गोल्डन कार्ड
- 1354 से ज्यादा मरीजों का का नहीं हुआ भुगतान
- 19,000 से ज्यादा के नहीं बने हैं गोल्डन कार्ड
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आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में अभी तक कुल लाभार्थियों में से महज 5.5 प्रतिशत मरीजों को ही इलाज मिला है। अस्पताल से छुट्टी हो चुके 1354 मरीज का भुगतान नहीं हुआ है, जबकि 19553 लाभार्थी ऐसे हैं, जिनके अभी तक गोल्डन कार्ड नहीं बने हैं।
मेरठ में योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी। निजी अस्पतालों द्वारा कम शामिल होना और गोल्डन कार्ड गलत जाने, अपात्रों के शामिल होने आदि कई वजहों यह पहले से परवान नहीं चढ़ पा रही थी, अब कोरोना काल में इसे भी झटका लगा है।
आयुष्मान में जिले में दो लाख 11 हजार 416 परिवार चिह्नित हैं। इनमें 89 हजार 109 परिवार देहात और एक लाख 22 हजार 307 परिवार शहरी क्षेत्र के हैं। साल 2011 की आर्थिक गणना की सूची के आधार पर इसे तैयार किया गया है।
इस योजना के तहत 1352 तरह की जांच और सर्जरी समेत पांच लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी है। इसमें 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार उठा रही है। इस योजना को लाभार्थी को किसी तरह का खर्च नहीं करना होता है। अस्पताल खुद बीमा कंपनी से क्लेम लेता है। लेकिन योजना में अभी भी सभी लाभार्थियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आयुष्मान योजना
गोल्डन कार्ड बने: 191863
मरीजों को इलाज: 11786
क्लेम मिला: 10432
मानकों को पूरा न करने वाले दो अस्पतालों को इस योजना से बाहर कर दिया गया है, जबकि तीन और अस्पतालों को अलग करने की तैयारी है। फिलहाल आयुष्मान योजना में 63 अस्पताल पंजीकृत हैं। इनमें से छह सरकारी और बाकी निजी हैं। तीन और अस्पताल बाहर हो जाने के बाद इनकी संख्या 60 रह जाएगी।
जल्द हर लाभार्थी तक पहुचेंगे गोल्डन कार्ड
आयुष्मान योजना में मेरठ बेहतर कर रहा है। जल्द हर लाभार्थी तक गोल्डन कार्ड पहुंचेंगे। 95 प्रतिशत मरीजों के इलाज का पैसा (17 करोड़ 3 लाख रुपये) अस्पतालों को मिल चुका है। -डॉ. पूजा शर्मा, एसीएमओ