ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम दे रहा धोखा, दस लाख उपभोक्ता परेशान, एप से बन रहे बिल
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पीवीवीएनएल का आॅनलाइन बिलिंग सिस्टम पिछले कई दिन से उपभोक्ताओं को धोखा दे रहा है। उपभोक्ता ऑनलाइन बिल नहीं जमा कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन बिल जनरेट हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। इसके अलावा उपभोक्ताओं को 35 से 40 दिन का बिल बनाकर दिया जा रहा है। इस कारण टैरिफ बदलने से उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
पीवीवीएनएल का बिलिंग सिस्टम दो भागों में बांटा गया है। एक सिस्टम के तहत बिल जमा होता है और दूसरे सिस्टम के जरिये उपभोक्ताओं का बिल बनाया जाता है। बनाए हुए बिल की फीडिंग एचसीएल के बिलिंग सिस्टम में फीड की जाती है। इसके बाद ही उपभोक्ता का बिल मैनुअल और आॅनलाइन जमा हो पाता है।
पीवीवीएनएल ने पिछले दिनों पुरानी बिलिंग कंपनियों को हटाकर दो नई बिलिंग एजेंसी इंवेंटिव और फ्लूएंट ग्रिड को ठेका दिया है। इंवेंटिव कंपनी के पास मेरठ, सहारनपुर और नोएडा जोन का ठेका है और फ्लूएंट ग्रिड के पास गाजियाबाद, मुरादाबाद जोन का ठेका है। ये दोनों कंपनी मोबाइल एप से बिलिंग कर रही है। नई व्यवस्था और नई बिलिंग एजेंसी होने के चलते न तो उपभोक्ताओं के बिल समय से बन रहे हैं और न ही समय से सिस्टम में फीड हो पा रहे हैं।
दस लाख उपभोक्ता परेशान
पीवीवीएनएल के करीब 50 लाख उपभोक्ताओं में से लगभग 20 फीसदी आॅनलाइन बिल जमा करते हैं। ऑनलाइन बिलिंग व्यवस्था बेपटरी होने से करीब 10 लाख उपभोक्ता परेशान हैं। सिटी सेंटर स्थित कंप्यूटर सर्विस सेंटर चलाने वाले इफ्तिखार ने बताया कि मीटर रीडर उनका बिजली बिल तीन दिन पहले बनाकर दे गया था। लेकिन अभी तक उनका बिल आॅनलाइन शो नहीं कर रहा है।
इस कारण वह बिल जमा नहीं कर पा रहे हैं। पल्लवपुरम निवासी श्रवण चौधरी, विजय आनंद, सोफीपुर निवासी भारत भूषण आदि ने भी यही समस्या बताई। लोगों का कहना है देय तिथि निकलने के डर से उन्हें कैश काउंटरों पर जाकर ही बिल जमा करना पड़ रहा है।
नया बिल फॉर्मेट बना मुसीबत
मोबाइल एप आधारित बिलिंग व्यवस्था शुरू होने पर बिल फॉर्मेट भी पूरी तरह बदल गया है। उपभोक्ताओं का कहना है पहले मिलने वाले बिल में तो उन्हें रीडिंग, डिमांड, पेनाल्टी आदि की जानकारी आसानी से पता लग जाती थी। लेकिन नए फॉर्मेट का बिल तो समझ ही नहीं आ रहा है।
35 से 40 दिन का मिल रहा बिल
उपभोक्ताओं को हर महीने मिलने वाला बिल भी देरी से बनाया जा रहा है। उनकी शिकायत है कि 35 से 40 दिन का बिल मिल रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि एक महीने से ज्यादा के बिल में रीडिंग ज्यादा होने से टैरिफ बदल जाता है। इस कारण उन्हें बढ़ी बिजली दरों का भुगतान करना पड़ता है।
पहले की तरह होने लगेंगे बिल जनरेट
ऑनलाइन बिलिंग में दिक्कत होनेकी जानकारी मेरे संज्ञान में आई है। इसके लिए बिलिंग एजेंसी को सख्त किया गया है। जल्द ही उपभोक्ताओं के बिल पहले की तरह जनरेट होने लगेंगे। 30 दिन से अधिक का बिल बनाने पर एजेंसी पर कार्रवाई होगी। -आशुतोष निरंजन, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ
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