UP: मेरठ में बनेगा नीम-पीपल कॉरिडोर, इन क्षेत्रों को चिन्हित कर बनाई योजना, जल्द लगाए जाएंगे पेड़
उत्तर प्रदेश के मेरठ में बन रहे हाईवे और रैपिड रेल कॉरिडोर के कारण लगातार पेड़ों को काटा जा रहा है। पर्यावरण को बचाने के लिए अब नीम पीपल कॉरिडोर बनाने की कवायद शुरू हो गई है। पेड़ों को आवासीय क्षेत्रों के पांच किलोमीटर के क्षेत्रफल के बीच में लगाने की तैयारी है। इससे ऑक्सीजन की मात्रा में भी वृद्धि होगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मेरठ में बन रहे हाईवे और रैपिड रेल कॉरिडोर के कारण कई पेड़ों को काटा जा रहा है। काटे जा रहे पेड़ों की संख्या बढ़ाने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने पीपल और नीम कॉरिडोर बनाने की पहल की है। अगले सप्ताह से इस पर कार्य शुरू हो सकता है।
लगाए जाएंगे एक हजार से ज्यादा पेड़
पेड़ों के काटे जाने के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसमें ऑक्सीजन जीवन के लिए जरूरी है। ऑक्सीजन की मात्रा कम हो रही है। एमडीए के उद्यान विभाग ने ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
इस योजना में चिन्हित क्षेत्रों में लगभग एक हजार पौधे लगाए जाएंगे। पेड़ गंगानगर डिवाडर रोड और किला परीक्षितगढ़-मवाना रोड एक्सटेंशन मार्ग पर लगाए जाएंगे। पौधरोपण होने से क्षेत्रवासियों को भी ऑक्सीजन मिलेगी। इसके अलावा भी पेड़ हमारे पर्यावरण के लिए बहुत जरूरी हैं।
यह भी पढ़े : Murder: साजिद इस दुनिया में नहीं है.., घर के बाहर मिली पर्ची से परिजनों में मचा हड़कंप, पांच दिन से लापता था बेटा
आवासीय क्षेत्रों को चिह्नित कर बनाई योजना
एमडीए मानसून के दौरान पेड़ लगाने की शुरुआत करेगा। इस बार आवासीय क्षेत्रों को चिह्नित कर योजना बनाई गई है। पेड़ों को आवासीय क्षेत्रों के पांच किलोमीटर के क्षेत्रफल के बीच में लगाने की तैयारी है।
गंगानगर क्षेत्र इसी के मद्देनजर चिह्न्ति किया गया है। यहां आसपास कई आवासीय कॉलोनियां आसपास ही हैं। सघन पौधरोपण होने से क्षेत्रवासियों को भी ऑक्सीजन मिलेगी। साथ ही पेड़ों की रखवाली भी आसान होगी। खाली स्थानों या सुनसान स्थलों पर पेड़ों की रखवाली विभाग के कर्मचारी नहीं कर पाते हैं।
गंगानगर डिवाइडर रोड पर नीम, किला परीक्षितगढ़-मवाना रोड पर लगेंगे पीपल के पेड़
गंगानगर डिवाइडर रोड की लंबाई लगभग 2.5 किमी है। इसमेें तीन लेयर बांटकर नीम के पेड़ लगाए जाने हैं। इसी तरह किला परीक्षितगढ़-मवाना रोड भी लगभग तीन किमी की है। इसके किला रोड से चलने पर बाएं किनारे पीपल के पेड़ लगाए जाने हैं। यहां पेड़ लगाने के लिए काफी खुला स्थान है।
औषधीय गुणों के साथ मिलेगी छाया
नीम का पेड़ धरती के कल्पवृक्ष के नाम से जाना जाता है। कोरोना काल में नीम की पत्तियों को उबालकर पीने से कई रोगों से छुटकारा मिला। इसी को ध्यान में रखते हुए एमडीए ने स्वास्थ्य के साथ-साथ छाया की दोहरी सुविधा देने की योजना तैयार की है।
नीम 15-20 मीटर लंबाई तक पहुंच जाता है। इसकी छाल कठोर होती है। इसके अलावा पीपल का पेड़ पूजा जाता है। इसकी छाल के उपयोग से पेट साफ रहता है। वहीं, दोनों पेड़ अन्य पेड़ों की अपेक्षा 20 प्रतिशत ऑक्सीजन अधिक देते हैं।