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सास-ससुर में ही माता-पिता के दर्शन करने चाहिए : वशिष्ठ
Wed, 06 May 2026 05:42 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 06 May 2026 05:42 PM IST
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शास्त्री नगर के ब्लॉक पुराण शिव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा
मेरठ। नर नारायण सेवा संस्थान द्वारा शास्त्री नगर के ब्लॉक पुराण शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन बाल कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने सती चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि स्त्री को अपने सास-ससुर में ही माता-पिता का दर्शन करना चाहिए। मन, वचन और कर्म से अपने पति के प्रति समर्पित रहना चाहिए।
उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति और मोबाइल के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके कारण बेटियां अपने कर्तव्यों से भटक रही हैं। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे प्रारंभ से ही अपनी बेटियों को अच्छे संस्कार दें, ताकि उनका दांपत्य जीवन सुखमय और सफल हो सके तथा आने वाली पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल बने।
कथा के दौरान प्रहलाद चरित्र का वर्णन करते हुए व्यास जी ने कहा कि भगवान अपने भक्त के प्रेम में इतने भाव-विभोर हो जाते हैं कि वे अपने नियमों को भी बदल देते हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि भगवान भी भक्त की भावना के आगे झुक जाते हैं।
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इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष आचार्य कंवल नैन वशिष्ठ, ओम प्रकाश मखीजा, केवल खन्ना, मंडपाचार्य एवं व्यवस्थापक मुकेश शर्मा, पंडित ध्रुव वशिष्ठ, वैदिक पंडित गौरव नौटियाल, पंडित शिव कुमार शर्मा, पंकज कतीरा, मनोज शर्मा सहित अनेक श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा।
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मेरठ। नर नारायण सेवा संस्थान द्वारा शास्त्री नगर के ब्लॉक पुराण शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन बाल कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने सती चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि स्त्री को अपने सास-ससुर में ही माता-पिता का दर्शन करना चाहिए। मन, वचन और कर्म से अपने पति के प्रति समर्पित रहना चाहिए।
उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति और मोबाइल के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके कारण बेटियां अपने कर्तव्यों से भटक रही हैं। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे प्रारंभ से ही अपनी बेटियों को अच्छे संस्कार दें, ताकि उनका दांपत्य जीवन सुखमय और सफल हो सके तथा आने वाली पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल बने।
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कथा के दौरान प्रहलाद चरित्र का वर्णन करते हुए व्यास जी ने कहा कि भगवान अपने भक्त के प्रेम में इतने भाव-विभोर हो जाते हैं कि वे अपने नियमों को भी बदल देते हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि भगवान भी भक्त की भावना के आगे झुक जाते हैं।
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इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष आचार्य कंवल नैन वशिष्ठ, ओम प्रकाश मखीजा, केवल खन्ना, मंडपाचार्य एवं व्यवस्थापक मुकेश शर्मा, पंडित ध्रुव वशिष्ठ, वैदिक पंडित गौरव नौटियाल, पंडित शिव कुमार शर्मा, पंकज कतीरा, मनोज शर्मा सहित अनेक श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा।