हस्तिनापुर। जंबूद्वीप में चल रहे भगवान शांतिनाथ समवसरण पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के अंतर्गतर रविवार को यागमंडल विधान, जाप्यानुष्ठान, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा की गई। सुबह पंचामृत अभिषेक के साथ महा शांतिधारा प्रारंभ की गई। श्रद्धालु को पूजन में बैठने का अवसर मिला। इंद्र प्रतिष्ठा की गई एवं मंडल पर अर्घ्य चढ़ाया गया।
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में शास्त्रीय विधियों के साथ पाषाण में प्राण प्रतिष्ठा मंत्र दिया जाता है। यह प्रतिमा अतिशयकारी एवं पूज्य हो जाती हैं। सौधर्म इंद्र सुभाषचंद जैन, मंगला साहू, सुषमा साहू, धनकुबेर सुजीत, मनीषा साहू आदि इंद्रों ने मुख्य रूप से भाग लिया। सभी ग्रहों की शांति के लिए नवग्रह हवन किया गया। प्रत्येक गृह के स्वामी इंद्र को आहुति दी गई। वहीं, पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण दिशाओं में आराध्य देवताओं को अर्घ्य समर्पित किया गया। पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह पंचकल्याणक मात्र मंचन नहीं है, ये जीवन में अनंत गुणा पुण्य को बढ़ाने वाला होता है। प्रत्येक जीव एक दिन अपनी आत्मा को परमात्मा बना लेता है। प्रज्ञा श्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी का मंगल उद्बोधन हुआ। संस्थान के अध्यक्ष रवींद्र कीर्ति स्वामीजी के द्वारा कार्यक्रम की समस्त रूपरेखा बताई गई। प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन, पं. दीपक जैन द्वारा कार्यक्रम संपन्न कराया। सायंकालीन सत्र में तीर्थंकर भगवंतों की एवं पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की मंगल आरती सम्पन्न की गई। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुत की गई।