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NRHM घोटाला: आरोपी वीके चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जेल

Sat, 05 Jan 2019 01:42 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 05 Jan 2019 01:42 PM IST
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NRHM scam: Police bring Accused VK Chaudhary meerut in 300 crores Land scam
वीके चौधरी

मेरठ में 300 करोड़ के जमीन घोटाले के मामले में पूर्व आवास आयुक्त की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे लेकर मेरठ पहुंची। ताजा जानकारी के अनुसार आरोपी को मेरठ की सीजीएम कोर्ट प्रथम में पेश किया गया जहां कोर्ट ने वीके चौधरी की जमानत की अर्जी को खारिज कर दिया। वहीं कोर्ट ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

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आरोप है कि वीके चौधरी ने 2004 में उप आवास आयुक्त के पद पर रहते हुए इंद्रप्रस्थ एस्टेट सहकारी आवास समिति लिमिटेड मेरठ की 52 एकड़ भूमि पर भूमाफियाओं से साठगांठ कर समिति को हाईजैक कराकर लगभग 250-300 करोड़ रुपयों का घोटाला किया था। गौरतलब है कि मेरठ पुलिस ने वीके चौधरी को शुक्रवार को लखनऊ से गिरफ्तार किया था। आगे जानें कैसे हुआ घोटाला और कैसे रची गई थी इस बड़े फर्जीवाड़े की योजना:-
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असली सहकारी समिति को फर्जी दर्शाकर इंद्रप्रस्थ एस्टेट सहकारी आवास समिति में लगभग 300 करोड़ की जमीन के घोटाला की पटकथा 500 किलोमीटर दूर लखनऊ में बैठे पूर्व उप आवास आयुक्त विपिन कुमार चौधरी ने रची थी।
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चार साल पहले जिला न्यायालय के आदेश पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। शुक्रवार को मुख्य आरोपी पूर्व उप आयुक्त आवास वीके चौधरी को दौराला पुलिस ने लखनऊ स्थित से गिरफ्तार किया। फिलहाल उन्हें जेल भेज दिया गया है। मामले में कई राज अभी खुलने बाकी हैं।

33 साल पहले बनी थी इंद्रप्रस्थ एस्टेट 
18 मार्च 1985 को इंद्रप्रस्थ एस्टेट सहकारी आवास समिति लिमिटेड मेरठ नाम से संस्था का पंजीकरण कराया गया। तत्कालीन उप आवास आयुक्त व उप निबंधक उप्र आवास विकास ओंकार यादव के समय में संस्था पंजीकृत हुई। उप आवास आयुक्त के पास सहकारी समितियों के डेलिगेट की पावर होती है।

मूल रूप से केरल निवासी के-पितांबरन यूको बैंक सोतीगंज शाखा में बतौर क्लर्क तैनात थे। उन्होंने समिति पंजीकरण से लेकर सदस्यों को जोड़ने का काम किया। समिति के कार्यालय का पता 31 साउथ सोतीगंज के पते पर पंजीकरण हुआ। उस समय के पितांबरन समिति के सचिव थे। 

वर्तमान में समिति के मुख्य कार्यवाहक अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि के-पितांबरन के समय में समिति से छह सौ सदस्य जुडे़।1992 तक रुड़की रोड़ स्थित इंद्रप्रस्थ सहकारी आवास समिति के नाम पर करोड़ों की जमीन हो गई।

इसमें सदस्यों के लिए भविष्य में रहने की प्लानिंग हो रही थी। लेकिन तभी भूमाफिया की नजर समिति की जमीन पर पड़ गई। उन्होंने समिति के सचिव के पितांबरन पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराये। सालों तक मामले में गहमागहमी के बाद 2003 में के पितांबरन ने समिति की आम बैठक बुलाई। इसमें सरधना रोड़ निवासी अशोक नगर निवासी नरेश कुमार को समिति का मुख्य कार्यवाहक अधिकारी नियुक्त कर दिया।

आम सभा के बाद वीके चौधरी ने रचा प्रपंच 
समिति सचिव नरेश कुमार ने बताया कि तत्कालीन उप आवास आयुक्त वीके चौधरी को लखनऊ पहुंचकर उन्होंने आम सभा के बारे बताया। इस पर उन्होंने आम सभा और उनके चुनाव को फर्जी बता दिया। 23 दिसंबर 2004 में वीके चौधरी ने असली सहकारी समिति को फर्जी बताकर समिति का नया पंजीकरण सर्टिफिकेट जारी कर दिया। जबकि असली समिति के कार्यवाहक अधिकारी नरेश कुमार पर मुकदमा दर्ज करा दिया।

इंद्रप्रस्थ एस्टेट में 65 से ज्यादा भूखंडों को अवैध तरीके से बेच दिया गया। वीके चौधरी के साथ मेरठ जागृति विहार निवासी सतपाल सिंह देशवाल, डिफेंस कालोनी निवासी राजमोहन का भी हाथ रहा। कुल मिलाकर समिति की करीब 300 करोड़ रुपये कीमत की 52 एकड़ (2,10,441 वर्ग मीटर) जमीन को अवैध रूप से बेचा गया। 

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