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अब एसएमएस के सहारे गन्ना आपूर्ति

Thu, 24 Oct 2019 02:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Oct 2019 02:15 AM IST
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मवाना। गन्ना विभाग में पर्ची वितरण में इस बार धांधली नहीं हो सकेगी। समस्त रिकार्ड लखनऊ से अपलोड होगा। समितियों उससे लिंक रहेंगी तथा केवल पर्ची निकालकर वितरण कर सकेंगी। हालांकि किसानों को अब भी विश्वास नहीं है कि नई व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी रह पाएगी।
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इस बार पर्चियों के वितरण के लिए शासन द्वारा नया सिस्टम लागू किया गया है। गन्ना समिति मवाना के विशेष सचिव प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया कि इस बार नया सिस्टम लागू हुआ है। जिसमें पर्चियों का समस्त रिकार्ड लखनऊ से अपलोड है। जिससे समस्त समितियां लिंक रहेंगी।
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समिति स्तर पर गन्ना डालने के लिए केवल पर्चियां निकाली जा सकेंगी। इस बार पूरा सिस्टम पारदर्शी रहेगा। कोई भी पर्चियों में धांधली नहीं कर सकेगा। जैसा की पहले आरोप लगते रहे हैं।
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रिकार्ड में संशोधन आसान नहीं होगा
गन्ना समिति सचिव प्रदीप शर्मा ने बताया कि इस बार समिति स्तर पर कोई भी संशोधन पर्ची आदि में नहीं हो सकेगा। इसके लिए जिला गन्ना अधिकारी की अनुमति तथा गन्ना आयुक्त की संस्तुति के बाद ही कोई त्रुटि आदि ठीक हो सकेगी।
किसान को एसएमएस के माध्यम से मिलेगी सूचना
गन्ना समिति सचिव ने बताया कि इस बार जिन किसानों के फोन नंबर अपलोड हैं। उनको एसएमएस से पर्ची जारी होने की सूचना मिल जाएगी। यदि किसी कारणवश पर्ची नहीं मिल पाती है तो प्राप्त एसएमएस दिखाकर किसान अपना गन्ना तुलवा सकता है। उसको पर्ची के लिए चक्कर काटने की जरूरत नहीं पडे़गी। वहीं, पर्चियों की स्थिति को किसान कैन ई गन्ना एप तथा कैनयूपीडॉटइन पर भी देख सकते हैं। गन्ना समिति सचिव का कहना है कि इस बार पर्ची वितरण की प्रणाली पूरी तरह से पारदर्शी है।
किसान सभा के मंडलीय सचिव जितेंद्रपाल सिंह का कहना है कि इसमें भी बहुत सारे झोल रहेंगे। बीते वर्ष भी ऐसा ही कहा था कि जितनी गड़बड़ी बीते वर्ष हुई इतनी कभी नहीं हुई। जब तक गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा का प्रावधान नहीं होगा, तब तक किसान के साथ गड़बड़ी होना बंद नहीं होगी।

वरिष्ठ किसान नेता हरवीर सिंह निलौहा का कहना है कि जो सिस्टम बनाया है वह पारदर्शी नहीं है। अभी तक कच्चे कलेंडर दिए हैं, पक्के नहीं दिए हैं। शुरू में जो पर्ची आएंगी बिना कलेंडर आएंगी। जिनके बांड रिकार्ड में समाप्त कर दिए हैं, उनका अभी तक रिकार्ड नहीं दिया है। कैसे कह सकते हैं पारदर्शी है। गन्ना समिति के पास स्टाफ नहीं है। मिल का स्टाफ गन्ना तौलते हैं। समिति तो केवल रबर स्टांप बनकर रह गई है। पारदर्शिता के नाम पर किसानों को धोखा दिया जा रहा है।
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