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नहीं मिला मुस्लिमों का साथ, जीत नहीं आई सपा के हाथ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Sat, 02 Dec 2017 11:26 AM IST
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मेयर पद पर बसपा की जीत के बाद वापस जाते सपा प्रत्याशी के पति।
- फोटो : अमर उजाला
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नगर निकाय चुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि इस बार सपा को मुस्लिमों का साथ नहीं मिला। सपा के तमाम सूरमा फेल हो गए। न सिर्फ महापौर चुनाव में सपा को तीसरा स्थान मिला, बल्कि सिंबल पर लड़ाए गए सपा के पार्षद प्रत्याशी भी कोई कमाल नहीं दिखा सके। 73 में से सिर्फ चार प्रत्याशियों को ही जीत मिली।
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सपा 13 नगर पंचायतों में खाता भी नहीं खोल पाई। जमानत भी सिर्फ सिवालखास और किठौर में ही बच पाई। हस्तिनापुर, बहसूमा, परीक्षितगढ़, दौराला, लावड़, करनावल, फलावदा, हर्रा, खिवाई, खरखौदा और शाहजहांपुर में पार्टी प्रत्याशी जमानत भी नहीं बचा पाए। किठौर में सपा के पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर की भाभी चुनाव हार गईं, उन्हें बसपा के कद्दावर नेता मुनकाद अली की पुत्रवधू ने मात दी। मवाना में सपा के पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि, सिवालखास में पूर्व सपा विधायक गुलाम मोहम्मद सपा प्रत्याशी को जीत नहीं दिला पाए। शहर विधायक रफीक अंसारी महापौर और पार्षदों को मुस्लिम वोट नहीं दिला पाए तो सपा महानगर अध्यक्ष अब्दुल अलीम अलवी अपने भाई अब्दुल फहीम को पार्षद का चुनाव तक नहीं जिता सके। अब्दुल फहीम वार्ड 49 से सपा के सिंबल पर चुनाव लड़े।
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पार्टी की अंतर्कलह भी बनी वजह
सपा की हार की पटकथा पार्षद प्रत्याशियों के टिकट घोषित करते ही लिख गई थी। इससे न सिर्फ सपा में अंतर्कलह बढ़ गई, बल्कि कई स्थानीय सपा नेताओं ने पार्टी से किनारा भी कर लिया। इन्होंने टिकट वितरण में धांधली के भी आरोप लगाए। सपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव बुंदू खां और गुलशेर मलिक का मामला सुर्खियों में रहा। इसके अलावा महापौर पद के लिए नौ लोगों ने आवेदन किए थे, जबकि 90 वार्डों के पार्षद पद पर 375 ने आवेदन किया था। महापौर के लिए तो खुलकर कोई विरोध सामने नहीं आया, मगर पार्षद पद के लिए जमकर खींचतान हुई।
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यह भी एक बड़ा कारण
शहर में जहां सपा की हार की वजह पार्टी की अंतर्कलह मानी जा रही है, वहीं यह भी कहा जा रहा है कि मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशी को हराने के लिए एकजुट होकर बसपा को वोट किए। दरअसल, बसपा का अपना वोट बैंक है, जबकि सपा के पास अपना उतना वोट बैंक नहीं है।
40 से ज्यादा सपाइयों पर गिरेगी गाज
नगर निकाय चुनाव के नतीजे आ गए हैं। अब पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाले सपाइयों पर गाज गिरना तय है। इनकी सूची हाईकमान को भेज दी गई है। ऐसे सपाइयों की सूची में 40 से ज्यादा नाम हैं। महानगर संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी, पूर्व पार्षद, नामित पार्षद, विधानसभा स्तर के पदाधिकारी आदि शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने पार्टी के खिलाफ महापौर और पार्षद प्रत्याशियों के खिलाफ बसपा, भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए खुलेआम और गुपचुप ढंग से वोट मांगे हैं।
मतदान वाले दिन ही हो गया था आभास
सपाइयों को मतदान वाले दिन ही आभास हो गया था कि उनकी हार तय हो चुकी है। यही वजह थी कि उन्होंने मतदान खत्म होते ही प्रेस कांफ्रेंस कर निकाय चुनाव रद्द करने की मांग की थी और इसकी वजह महापौर और पार्षद पद के मतदान में दोनों पदों की ईवीएम नियम विरुद्ध एक साथ एक ही टेबल पर रखा गया हुआ बताया था।
बड़े सपा नेताओं ने नहीं किया सहयोग: दीपू मनोठिया
सपा की महापौर प्रत्याशी दीपू मनोठिया का कहना है कि उन्हें मुस्लिमों के सिर्फ दो-तीन हजार वोट ही मिले, बाकी वोट वाल्मीकि और यादव समाज के मिले। उनके साथ सपा के बड़े नेता नहीं रहे, जिसकी वजह से उनकी हार हुई। उन्होंने कहा कि उनके साथ शहर विधायक, महानगर अध्यक्ष और आदिल चौधरी रहे। लेकिन शहर विधायक की मुखालफत थी, जिस कारण भी मुस्लिम वोटर ने उनसे किनारा किया। वे सपा हाईकमान को इससे अवगत कराएंगे। कहा कि सपा के पूर्व मंत्री आजम खां की शहर में जनसभा रखी जानी चाहिए थी, जिससे मुस्लिमों का रुझान सपा की तरफ होता। लेकिन वह भी नहीं हुआ।
भाजपा को हराकर विपक्ष की जीत बड़ी बात: रफीक
शहर विधायक रफीक अंसारी का कहना है कि सपा और बसपा का मकसद महापौर चुनाव में भाजपा को हराना था, बसपा इसमें कामयाब हुई है। बड़ी बात यह है कि विपक्ष की जीत हुई है। मुस्लिम भाजपा से प्रताड़ित थे, उन्होंने भाजपा को हराने के लिए वोट किया। वे वोटरों का सम्मान करते हैं।
सपाइयों के लिए लोस चुनाव होगी बड़ी चुनौती
लोकसभा चुनाव-2019 सपा के लिए और मुश्किल होने वाला है। मुस्लिमों वोटों को फिर से रिझाना सपा के लिए बड़ी चुनौती होगा। निकाय चुनाव में मुस्लिम वोटरों का रुख बसपा की तरफ देखने को मिला है। ऐसे में मेरठ में सपाइयों को लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोट पाने के लिए नए सिरे से मशक्कत करनी होगी। हालांकि सपा नेताओं का कहना है कि लोकसभा चुनाव में मुस्लिम सपा को ही वोट करेंगे, वे नाराज नहीं हैं।