फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   not come to help after daughter and wife death

स्वतंत्रता सेनानी की बेटी-पत्नी को नहीं मिले चार कंधे

Sat, 08 May 2021 02:07 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 08 May 2021 02:07 AM IST
विज्ञापन
not come to help after daughter and wife death
स्वतंत्रता सेनानी की बेटी-पत्नी को नहीं मिले चार कंधे
विज्ञापन

मेरठ। देश की स्वतंत्रता के लिए जीवन पर भर प्रयासरत रहे रामनिवास गोयल की पत्नी और बेटी को अंत समय में चार कंधे भी नहीं मिले। रिश्तेदारों के साथ आसपास के लोग भी मदद के लिए आगे नहीं आए। 12 घंटे वृद्ध महिला का शव घर में पड़ रहा। सामाजिक संगठन के प्रयास के बाद नगर निगम की एंबुलेंस को बुलाकर शव को श्मशान घाट पहुंचाया गया। मृतक महिला के बेटे ने अंतिम संस्कार किया।
सोफीपुरम इंद्रप्रस्थ एस्टेट निवासी योगेंद्र ने बताया कि उनके पिता रामनिवास गोयल का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान रहा है। उनकी 38 वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है। बृहस्पतिवार सुबह उनकी बहन और वर्तमान में सिंचाई विभाग में क्लर्क के रूप में सेवारत साधना बंसल की मृत्यु हो गई। तमाम प्रयास के बाद भी बहन का अंतिम संस्कार की व्यवस्था में असमर्थ रहे। उन्होंने जन कल्याण वेलफेयर सोसायटी के वॉलेटियर्स को फोन कर मदद मांगी। टीम की मदद से देर शाम साधना का अंतिम संस्कार हुआ। भाई उसका अंतिम संस्कार कर लौटा भी नहीं था कि स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी किरण देवी का भी निधन हो गया। वह 85 वर्ष की थीं।
विज्ञापन

योगेंद्र गोयल ने मां की मृत्यु हो जाने पर पुन: समिति से मदद मांगी। समिति अध्यक्ष दुष्यंत रोहटा ने टीम के साथ पहुंचकर शव को एंबुलेंस तक पहुंचाया। सूरजकुंड श्मशान में अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई। दुष्यंत रोहटा ने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए अगर किसी कोविड मृतक को समस्या आ रही है तो 9837572425 पर संपर्क कर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

---
बेटी ने किया पिता का अंतिम संस्कार
मेरठ। कोरोना महामारी के कारण आसपास के लोग भी पड़ोसियों की मौत में शामिल नहीं हो रहे हैं। ऐसे में बेटियां ही बेटे की सभी कमी को पूर्ण करते हुए व्यवस्था कर रही हैं। शास्त्री नगर डी ब्लॉक निवासी मनोज खरे फार्मा कंपनी में कार्यरत था। पत्नी एमपीजीएस स्कूल में सुपरवाइजर हैं। कोरोना के चलते मनोज की शुक्रवार को मृत्यु हो गई। पड़ोसियों सहित अन्य दूर रिश्तेदार भी महामारी के चलते मदद के लिए नहीं पहुंच पाए। बेटी अविका खरे ने पिता का अंतिम संस्कार किया। सूरजकुंड श्मशान में इस महामारी के दौरान 15 दिन में ऐसे चार मामले सामने आ चुके हैं जहां बेटी ने संस्कार किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed