तस्वीरें: इंतजाम फेल, कांवड़ियों के कब्जे में रही उत्कल, जनशताब्दी, नहीं चली विशेष रेल
कांवड़ियों को संभाल पाने में आरपीएफ और जीरआरपी फेल साबित हो रही है। सोमवार शाम 4.42 बजे सिटी स्टेशन पहुंची जनशताब्दी पर कांवड़ियों ने कब्जा करना शुरू कर दिया। सिटी स्टेशन से देहरादून तक सफर करने वाले यात्रियों को भी ट्रेन में चढ़ने में परेशानी हुई। जिसके चलते कांवड़ियों से अलग यात्री भी ट्रेन के आरक्षित कोच में चढ़ रहे थे। लेकिन आरपीएफ, जीरआरपी भी प्लेटफॉर्म से नदारद रही।
वहीं, शाम पांच बजे पुरी से चलकर वाया मेरठ हरिद्वार को जाने वाली उत्कल एक्सप्रेस का भी हाल यही रहा। उत्कल एक्सप्रेस के आरक्षित कोच में भी कांवड़ियों का कब्जा रहा। सिटी स्टेशन पर एक प्लाटून पीएसी होने के बाद भी कोई पुलिसकर्मी कांवडियों को समझा नहीं सका। जबकि कांवड़ यात्रा से पहले पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग दी गई थी। जिससे कांवड़ियों से अच्छे व्यवहार से पेश आते हुए उन्हें समझाया जा सके, लेकिन इसका भी कोई असर नहीं हुआ।
लगातार दूसरे दिन सिटी स्टेशन पर उत्कल और जनशताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों पर कांवड़ियों ने कब्जा जमाए रखा। मंगलवार शाम के समय नई दिल्ली से हरिद्वार की ओर जाने वाली दोनों ट्रेनों में कांवड़ियों का हुजूम उमड़ पड़ा। पुलिसकर्मियों ने कई बार कांवड़ियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। रेलवे ने कांवड़ यात्रा को गंभीरता के साथ न लेते हुए स्पेशल ट्रेन की शुरुआत नहीं की।
उत्तर रेलवे की तरफ से एकमात्र दिल्ली-सहारनपुर पैसेंजर को हरिद्वार तक बढ़ाया गया। इस ट्रेन के बढ़ाने से सबसे ज्यादा नुकसान दैनिक यात्रियों को हुआ। सुबह सात बजे सिटी स्टेशन आने वाली यह ट्रेन औसत चार से पांच घंटे की देरी से सिटी स्टेशन पहुंच रही है। ताजा हालात मंगलवार को नजर आए हरिद्वार से चलकर दिल्ली को जाने वाली पैसेंजर अपने तय समय से चार घंटे 31 मिनट की देरी से सुबह 7.04 के बजाय 11.35 बजे सिटी स्टेशन पहुंची।
ट्रैक पर पहुंचे कांवड़िये, लगा दी दौड़
ट्रेन में चढ़ने के लिए कांवड़िये ट्रैक के बीच में पहुंच गए। दूसरी तरफ ट्रेन के आते ही ट्रैक पर दौड़ लगा। इस दौरान ट्रेन भी आ गई, गनीमत रही की कोई हादसा नहीं हुआ। आनन-फानन में आरपीएफ ने कांवड़ियों को समझाया लेकिन उनसे बहस भी हुई। ट्रेन में चढ़ने के लिए महिलाओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
रेलवे ने हर वर्ष की तरह इस बार भी अतिरिक्त ट्रेन की घोषणा नहीं की। हर वर्ष कांवड़ियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इसके बाद भी रेलवे गंभीर नहीं है। रेलवे की तरफ से सिर्फ दिल्ली से वाया मेरठ, सहारनपुर को जाने वाली मेमू को हरिद्वार तक किया और दिल्ली जंक्शन से वाया मेरठ, ऋषिकेश तक जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में दो सामान्य श्रेणी के कोच बढ़ाकर पल्ला झाड़ लिया। लेकिन लाखों कांवड़ियों की भीड़ के चलते रेलवे का यह प्रयास फेल है।