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Meerut News: न प्रस्ताव, न टेंडर, नगर आयुक्त के लिए बना रहे आलीशान कैंप कार्यालय
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नगरायुक्त आवास के बराबर में निर्माण के दौरान बनकर तैयार की गई दीवार। .............. संवाद...
महानगर की जनता स्वच्छता, जर्जर सड़कें, स्ट्रीट लाइट और जलभराव जैसी बुनियादी समस्याओं से त्रस्त है। नगर निगम के अफसर इन जनसमस्याओं के निस्तारण में भले ही फिसड्डी साबित हो रहे हों लेकिन अपने आवासों को चमकाने और आलीशान सुख-सुविधाएं जुटाने में बेहद माहिर हैं। ताजा मामला नगर आयुक्त के कैंप कार्यालय के निर्माण का है, जिसे लेकर शहर की सियासत गरमा गई है।
आरोप है कि नगर आयुक्त आवास के पास स्थित अपर नगर आयुक्त के सरकारी बंगले को बिना किसी ठोस अनुमति के ढहा दिया गया। कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर बिना किसी बोर्ड प्रस्ताव और बिना टेंडर प्रक्रिया के यहां नगर आयुक्त का भव्य कैंप कार्यालय खड़ा कर दिया गया है। भाजपा पार्षदों ने इसकी शिकायत प्रमुख सचिव नगर विकास व कमिश्नर से शिकायत करने की बात कही हैं। उन्होंने नए भवन का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया।
दरअसल वार्ड-50 से पार्षद संजय सैनी व वार्ड-29 से पार्षद पवन चौधरी शुक्रवार को निगम में गए थे। पार्षद संजय सैनी ने अपने वार्ड में सौंदर्यकरण और पार्क में लाल पत्थर लगाने का प्रस्ताव मुख्य अभियंता निर्माण पीके सिसोदिया को दिया। मुख्य अभियंता ने आपत्ति जताकर प्रस्तावित फाइल के आधार पर अवर अभियंता से रिपोर्ट मांगने की बात कहीं। जिस पर पार्षद नाराज हो गए व निगम की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाया। शनिवार को दोनों पार्षद नगर आयुक्त के पास निर्माणाधीन भवन पर पहुंचे जोकि अपर नगर आयुक्त का सरकारी बंगला था। पार्षदों का कहना कि इस निर्माणाधीन भवन में नगर आयुक्त का कैंप कार्यालय बनाया जा रहा है। निगम की बोर्ड बैठक में न प्रस्ताव रखा और न कोई टेंडर कराया गया।
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नियमों को ताक पर रखकर अपर नगर आयुक्त का सरकारी बंगला हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। इस निर्माणाधीन भवन आलीशान बनाया जा रहा हैं। इसको लेकर पार्षदों ने नाराजगी जताते हुए प्रमुख सचिव नगर विकास और कमिश्नर को शिकायत पत्र देकर निगम पर कार्रवाई की मांग भी कर दी। पार्षदों का कहना कि निगम के पास पब्लिक की समस्या समाप्त करने के लिए पैसा नहीं हैं लेकिन अपने आवास और कैंप कार्यालय बनाने के लिए मनमानी तरीके से पैसा लगाया जा रहा है। निगम में तीन अपर नगर आयुक्त तैनात है, इसमें से एक अपर नगर आयुक्त का सरकारी आवास खत्म कर दिया गया है। बाकी दोनों अपर नगर आयुक्त के आवास पर कितना सरकारी पैसा खर्च किया है। इसका रिकॉर्ड भी निगम के दस्तावेज में नहीं हैं। पार्षद संजय सैनी व पवन चौधरी का कहना कि निगम की बोर्ड बैठक, कार्यकारिणी और अन्य बैठकों में भी इसका ये मुद्दा प्राथमिकता से उठाया जाएगा।
नगर आयुक्त के अधिकार (17-6 बी) के आधार पर कैंप कार्यालय का निर्माण कराया जा रहा हैं। अभी तक कुल 14-15 लाख रुपये ही खर्च हुए होंगे। निगम अधिकारियों को बैठक करने के लिए कोई जगह नहीं थी इसलिए नया निर्माण कराया गया हैं। — पीके सिसोदिया, मुख्य अभियंता निर्माण, नगर निगम
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आरोप है कि नगर आयुक्त आवास के पास स्थित अपर नगर आयुक्त के सरकारी बंगले को बिना किसी ठोस अनुमति के ढहा दिया गया। कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर बिना किसी बोर्ड प्रस्ताव और बिना टेंडर प्रक्रिया के यहां नगर आयुक्त का भव्य कैंप कार्यालय खड़ा कर दिया गया है। भाजपा पार्षदों ने इसकी शिकायत प्रमुख सचिव नगर विकास व कमिश्नर से शिकायत करने की बात कही हैं। उन्होंने नए भवन का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया।
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दरअसल वार्ड-50 से पार्षद संजय सैनी व वार्ड-29 से पार्षद पवन चौधरी शुक्रवार को निगम में गए थे। पार्षद संजय सैनी ने अपने वार्ड में सौंदर्यकरण और पार्क में लाल पत्थर लगाने का प्रस्ताव मुख्य अभियंता निर्माण पीके सिसोदिया को दिया। मुख्य अभियंता ने आपत्ति जताकर प्रस्तावित फाइल के आधार पर अवर अभियंता से रिपोर्ट मांगने की बात कहीं। जिस पर पार्षद नाराज हो गए व निगम की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाया। शनिवार को दोनों पार्षद नगर आयुक्त के पास निर्माणाधीन भवन पर पहुंचे जोकि अपर नगर आयुक्त का सरकारी बंगला था। पार्षदों का कहना कि इस निर्माणाधीन भवन में नगर आयुक्त का कैंप कार्यालय बनाया जा रहा है। निगम की बोर्ड बैठक में न प्रस्ताव रखा और न कोई टेंडर कराया गया।
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नियमों को ताक पर रखकर अपर नगर आयुक्त का सरकारी बंगला हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। इस निर्माणाधीन भवन आलीशान बनाया जा रहा हैं। इसको लेकर पार्षदों ने नाराजगी जताते हुए प्रमुख सचिव नगर विकास और कमिश्नर को शिकायत पत्र देकर निगम पर कार्रवाई की मांग भी कर दी। पार्षदों का कहना कि निगम के पास पब्लिक की समस्या समाप्त करने के लिए पैसा नहीं हैं लेकिन अपने आवास और कैंप कार्यालय बनाने के लिए मनमानी तरीके से पैसा लगाया जा रहा है। निगम में तीन अपर नगर आयुक्त तैनात है, इसमें से एक अपर नगर आयुक्त का सरकारी आवास खत्म कर दिया गया है। बाकी दोनों अपर नगर आयुक्त के आवास पर कितना सरकारी पैसा खर्च किया है। इसका रिकॉर्ड भी निगम के दस्तावेज में नहीं हैं। पार्षद संजय सैनी व पवन चौधरी का कहना कि निगम की बोर्ड बैठक, कार्यकारिणी और अन्य बैठकों में भी इसका ये मुद्दा प्राथमिकता से उठाया जाएगा।
नगर आयुक्त के अधिकार (17-6 बी) के आधार पर कैंप कार्यालय का निर्माण कराया जा रहा हैं। अभी तक कुल 14-15 लाख रुपये ही खर्च हुए होंगे। निगम अधिकारियों को बैठक करने के लिए कोई जगह नहीं थी इसलिए नया निर्माण कराया गया हैं। — पीके सिसोदिया, मुख्य अभियंता निर्माण, नगर निगम