निकाय चुनाव : चुन लीजिए कौन होगा बेहतर महापौर
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मेरठ में महापौर कौन बनेगा? यह तय होना अभी बाकी है। लेकिन बिसातें बिछ चुकी हैं, प्रत्याशियों ने जी तोड़ कोशिशें शुरू कर दी हैं। जनता को विश्वास दिला रही हैं कि वे ही सबसे बेहतर महापौर होंगी। शहर की तमाम समस्याएं हैं, जो लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हैं। उनके जेहन में तमाम सवाल हैं। अमर उजाला कार्यालय में बुधवार को महापौर पद के लिए चुनावी रण में उतरी तीन अहम प्रत्याशियों को आमंत्रित किया गया। जनता ने उनसे सीधे सवाल किए। पूछा कि जनता उन्हें महापौर क्यों चुनें। वे सबसे बेहतर क्यों हैं? शहरवासियों ने मुद्दे उठाए। भाजपा से कांता कर्दम, बसपा से सुनीता वर्मा और सपा से दीपू मनोठिया ने गंभीरता से सवालों के जवाब दिए। उनकी बात सुनी और अपना पक्ष रखा। दावा किया कि अगर उन्हें महापौर चुना जाता है तो वे शहर का विकास करेंगी। समस्याओं का निराकरण करेंगी और मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाएंगी।
शहरवासियों ने उठाईं समस्याएं
1- कूडा निस्तारण: शहर में जगह-जगह गंदगी फैली है, जिससे बीमारियां पनप रही हैं।
2- नालों की समस्या: लोगों के नाले में गिरने के मामले आ रहे हैं। केसरगंज के सामने नाले का हाल बुरा है। कुल मिलाकर नाले शहर के लिए नासूर बने हैं।
3- शहर का विकास: मेरठ स्मार्ट सिटी नहीं बन सका, जबकि तमाम दावे किए जा रहे थे।
4- शहर में डेयरी: शहर में डेयरी की समस्या है, जिसके गोबर से नाले चॉक हो जाते हैं। सड़कों पर गोबर से गंदगी रहती है।
5- जाम: शहर में जगह-जगह जाम लगा रहता है। इसे दूर करने के लिए ठोस कदम की जरूरत है।
6- अतिक्रमण: शहर में जगह-जगह अतिक्रमण है।
7- पार्किंग- शहर में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है।
8- कॉलोनियों का हैंडओवर न होना- काफी कॉलोनियों हैं, जिन्हें हैंडओवर नहीं किया गया है, जबकि उन कालोनियों में नगर निगम की ओर से कई तरह के टैक्स वसूले जाते हैं।
9- छेड़छाड़- स्कूलों से लौट रही लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं।
10- स्कूलों की बिगड़ी स्थिति- कई ऐसे सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चे हैं तो शिक्षक नहीं, शिक्षक हैं तो बच्चे नहीं। कई की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी हैं। नगर की स्कूलों का हाल बद से बदतर है।
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इन सवालों के के जवाब में बोलीं प्रत्याशी
कांता कर्दम- प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं थी, जिस कारण न तो मेरठ को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिल सका और न ही शहर का पूरी तरह से विकास हो सका। अब उनकी सरकार है। वे अगर मेयर बनीं तो मेरठ स्मार्ट सिटी बनेगा। कूडा, जाम, सफाई और डेयरी की समस्या का निस्तारण होगा। नाले अंडरग्राउंड बनाए जाएंगे। अतिक्रमण और पार्किंग की समस्या का प्लानिंग कर निस्तारण कराया जाएगा। कॉलोनियों का हैंडओवर कराया जाएगा। छेड़छाड़ के खिलाफ यूपी सरकार काफी सख्त है, कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। स्कूलों की स्थिति को सुधारा जाएगा। संविदा कर्मचारी का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। यहां दो हजार से ज्यादा संविदाकर्मी काफी कम पैसे पर काम कर रहे हैं, उन्हें कभी भी हटा दिया जाता है। हम उनकी समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे।
सुनीता वर्मा- पिछले महापौर भाजपा से थे, उन्होंने शहर के विकास के लिए कुछ नहीं किया। सात माह से भाजपा की सरकार भी है। किसी समस्या का निस्तारण नहीं हुआ। पूरा कार्यकाल ऐसे ही पूरा हो गया। वे अगर महापौर बनीं तो इन तमाम समस्याओं का निस्तारण होगा। अतिक्रमण, पार्किंग, कॉलोनियों का हैंडओवर न होना आदि सभी समस्याओं का निस्तारण करेंगी। छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने केकड़े कदम उठाए जाएंगे। स्कूलों की बदहाल स्थिति को सुधारा जाएगा। शहर का विकास करेंगी। मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाएंगी।
दीपू मनोठिया- शहर केविकास और समस्याओं के निस्तारण में जनप्रतिनिधि की भूमिका अहम होती है। पिछली बार भाजपा के महापौर थे। वे बताएं कि उन्होंने शहर के विकास और इन समस्याओं के लिए क्या किया। ये समस्याएं क्यों बनी हुई हैं, जनता परेशान है। सपा विकास करने वाली पार्टी है। मैं मेयर बनीं तो इन सभी समस्याओं को दूर किया जाएगा। शहर को स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा। शहर में सफाई की समस्या दूर की जाएगी।
क्या है प्रत्याशियों की संपत्ति
नामांकन के समय दिए गए अपने शपथ पत्र में कुछ इस तरह से प्रत्याशियों ने अपनी संपत्ति दशाई है। भाजपा प्रत्याशी कांता कर्दम के पास 22 लाख 22 हजार रुपये चल संपत्ति और 80 लाख रुपये की अचल संपत्ति है। इनके पास कोई वाहन नहीं है। बसपा उम्मीदवार सुनीता वर्मा के पास 26 लाख 44 हजार 244 रुपये की चल संपत्ति और एक करोड़ 65 लाख रुपये की अचल संपत्ति है। इनके पास एक कार है। सपा उम्मीदवार दीपू मनोठिया के पास कैश पांच लाख रुपये जबकि जेवरात ढाई लाख रुपये के हैं। मकान 25 लाख रुपये कीमत का है और दो बैंक खातों में 50-50 हजार रुपये दर्शाए हैं।
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