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नौचंदी मैदान में नहीं लगेगा नववर्ष मेला  

Tue, 26 Dec 2017 02:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
ब्यूरो/अमर उजाला Updated Tue, 26 Dec 2017 02:12 AM IST
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New year will not be held in the Nauchandi plain
मेला लगाने की अनु‌मति न मिलने पर नौचंदी मैदान में पड़े झूले। - फोटो : अमर उजाला
नौचंदी मैदान में नव वर्ष मेला अब नहीं लगेगा। कमिश्नर की तरफ से मेले के लिए सहमति नहीं दी गई है। पिछले साल यह मेला विवादों में घिर गया था। मामला लखनऊ तक पहुंचा था। जिसके चलते एसएसपी की तरफ से भी डीएम को पत्र लिखा गया था। 
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‘स्ट्रीट फूड एंड फिल्म फेस्टिवल’ नाम से नौचंदी मैदान में 26 दिसंबर से यह मेला लगाया जाना प्रस्तावित था। जिसके लिए नौचंदी मैदान में तैयारी भी चल रही थी। आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. संदीप पहल की तरफ से इसके विरोध में मुख्यमंत्री, कमिश्नर और डीएम समेत कई अधिकारियों को पत्र भेजा गया था। ‘मेरा शहर मेरी पहल’ संस्था के कोऑर्डिनेटर विपुल सिंघल ने इसकी अनुमति के लिए आवेदन किया था। लेकिन शिकायत होने पर यह दरख्वास्त वापस ले ली गई। बाद में आम आदमी पार्टी के अंकुश चौधरी ने अनुमति के लिए आवेदन किया। आवेदन में संस्था ने अपना कार्यालय कैंप ऑफिस आयुक्त लिखा था।
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इस मामले में एसएसपी की तरफ से डीएम को पत्र लिखा गया था। जिसमें कहा गया है कि एलआईयू रिपोर्ट के अनुसार 15 दिसंबर 2016 से आठ जनवरी 2017 तक नौचंदी मैदान में यह मेला पूर्व में लगाया गया था। आयोजकों द्वारा नौटंकी लगाने के लिए जगह भी आवंटित की गई। लेकिन नौटंकी में महिला कलाकारों द्वारा इस तरह का नृत्य पेश किया गया कि यह मेला विवादों में आ गया। बाद में मेले की आलोचना हुई तो उसे बंद करा दिया गया था।
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अधिवक्ता संदीप पहल द्वारा शासन व प्रशासन के उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर आयोजन की अनुमति न देने का अनुरोध किया गया है। एसएसपी मंजिल सैनी की तरफ से डीएम को जो पत्र लिखा गया, उसमें यह भी कहा गया कि प्रस्तावित मेले की अनुमति दिए जाने से पूर्व किसी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जांच कराने का कष्ट करें। माना जा रहा है कि पूरे मामले में एलआईयू और पुलिस की रिपोर्ट को देखते हुए यही उचित माना गया कि एक साल पहले के विवाद को देखते हुए अनुमति न दी जाए। 

लखनऊ तक पहुंचा था यह मामला
एक साल पहले मेले में मंच पर एक डांस कार्यक्रम की वीडियो वायरल हो गई थी। अश्लील डांस की वीडियो वायरल होने पर लखनऊ तक पहुंच गई थी। आयोजन पर सवाल खड़े हुए हो पुलिस प्रशासन ने मेला बंद करा दिया था। अब सवाल यह है कि जब प्रशासन ने इस मेले को मंजूरी ही नहीं दी तो फिर नौचंदी मैदान में इसकी तैयारी कैसे कर ली गई।

मेला लगाने का औचित्य नहीं
कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार का कहना है कि मेला लगाने का मंतव्य यह था कि ठेले, खोमचे वाले व आम नागरिकों को नववर्ष पर सुलभ मनोरंजन मिले। देशभक्ति की फिल्में देखने का मौका मिले। लेकिन आयोजन अपने उद्देश्य से भटकता दिखाई दे रहा है। ऐसे में मेला लगाने का कोई औचित्य नहीं है।
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