नववर्ष 2022: नए साल के स्वामी होंगे शनिदेव, इन तीन ग्रहों का रहेगा अधिक प्रभाव
नववर्ष में अलग-अलग राशियों में बैठे ग्रह करवट बदलेंगे। साल की शुरुआत में ही कालसर्प योग बन रहा है।
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नववर्ष 2022 के स्वामी शनिदेव होंगे। वह सुख और समृद्धि दिलाएंगे, लेकिन जीवन के कर्म करते हुए सतर्कता भी बरतनी होगी। खास बात यह भी है कि अंग्रेजी की तरह हिंदू वर्ष नवसंवत्सर विक्रम संवत 2079 की शुरुआत भी शनिवार (2 अप्रैल) से ही होगी। इस समानता के साथ अन्य कई संयोग भी इस साल रहेंगे। कुछ राशियों पर साढ़ेसाती तो कुछ पर ढैय्या का प्रभाव होगा।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि नववर्ष का आरंभ शनिवार को त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि पर चंद्रमा धनु राशि के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र के प्रथम चरण में होगा। साथ ही शिवरात्रि व्रत भी होगा।
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नववर्ष में अलग-अलग राशियों में बैठे ग्रह करवट बदलेंगे। साल की शुरुआत में ही कालसर्प योग बन रहा है। इसके चलते आने वाले समय में काफी उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी शनिवार से ही होगी।
तीन ग्रहों का रहेगा अधिक प्रभाव
तीन ग्रह गुरु, शनि और राहु का काफी प्रभाव रहेगा। नववर्ष में शनि 28 अप्रैल तक मकर राशि में रहेंगे। इस दौरान मकर, धनु और कुंभ राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती और मिथुन व तुला राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या रहेगी। 29 अप्रैल को शनि राशि से कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे।
नववर्ष में मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती और वृश्चिक व कर्क राशि पर शनि की ढैय्या शुरू हो जाएगी। शनि 19 जनवरी को मकर राशि मे अस्त हो जाएंगे और 21 फरवरी को उदय होंगे। चार जून को शनि कुंभ राशि मे वक्री होंगे। 12 जुलाई को वापस मकर राशि मे आ जाएंगे। उसके पश्चात मकर राशि में शनि 23 अक्तूबर को मार्गी होकर 17 जनवरी 2023 में कुंभ राशि मे जाएंगे।
यह रहेगी देव गुरु बृहस्पति की चाल
आचार्य संजय त्रिपाठी के अनुसार 24 फरवरी को देव गुरु बृहस्पति अस्त होंगे और 26 मार्च को उदय होंगे। इसके बाद देव बृहस्पति 13 अप्रैल 2022 को कुंभ राशि से मीन में प्रवेश करेंगे। वहीं 28 जुलाई को मीन राशि में वक्री होंगे और 23 नवंबर को मार्गी हो जाएंगे।
राहु और केतु बदलेंगे चाल
करीब 18 साल सात माह बाद राहु मेष राशि में प्रवेश करेंगे। राहु 12 अप्रैल को सुबह वृषभ से मेष राशि में गोचर करेंगे। वहीं, केतु भी तुला राशि में होंगे। राहु हमेशा वक्री चाल ही चलते हैं। वक्री अर्थात उल्टी चाल में ही वह भ्रमण करते हैं।
दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण होंगे
इस साल में दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण होंगे। भारत में केवल एक सूर्यग्रहण और एक चंद्रग्रहण ही दृश्य होगा।
शनि राजा और बृहस्पति मंत्री होंगे
ज्योतिष के अनुसार नए साल का आगमन धनु लग्न में होने से पूरे वर्ष पर शनि और बृहस्पति देव का आधिपत्य रहेगा। मंत्रिमंडल में इस बार राजा शनि और मंत्री बृहस्पति रहेंगे। अंक ज्योतिष के अनुसार अंग्रेजी नववर्ष 1/1/2022 का कुल योग 8 है। इसके आधार पर भी पूरे वर्ष न्यायक्षेत्र और अध्यात्म का काफी प्रभाव रहेगा।