कृषि विवि के नए कुलपति से बातचीत: कृष्ण कुमार बोले- फंड बढ़वाने व रिक्तपदों को भरना होगा पहली प्राथमिकता
कृषि विवि के नए कुलपति से अमर उजाला के रिपोर्टर की फोन पर खास बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि कृषि विवि का फंड बढ़वाने व रिक्तपदों को भरना पहली प्राथमिकता होगा।
विस्तार
कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के पूर्व सदस्य प्रो. कृष्ण कुमार सिंह को सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि का नया कुलपति बनाया गया है। नए कुलपति सोमवार से विवि का चार्ज संभालेंगे। कुलाधिपति व राज्यपाल ने बुधवार को आदेश जारी किए। उनके कुलपति बनने के बाद फोन पर उन्हें वैज्ञानिक बधाई दे रहे हैं।
डॉ. आरके मित्तल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कुलाधिपति ने डॉ. डीआर सिंह को अतिरिक्त कुलपति का कार्यभार सौंपा था। नए कुलपति को लेकर चर्चा चल रही थी कि जल्द ही कुलाधिपति नए कुलपति की घोषण करेंगी। बुधवार को कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पत्र जारी करते हुए प्रो. कृष्ण कुमार सिंह को सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि का नया कुलपति बनाए जाने का आदेश जारी किया।
प्रो. कृष्ण कुमार सिंह कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के पूर्व सदस्य रह चुके हैं। अप्रैल माह में उनका कार्यकाल पूरा हो गया था। इसके अलावा वह साढ़े चार साल तक डायरेक्टर सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग भोपाल में रहे। आईसीआर के डायरेक्टर जनरल का कार्यभार भी उन्होंने संभाला। फोन पर हुई बातचीत में प्रो. कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि वह मूलरूप से बनारस के चंदौली के रहने वाले है और वर्तमान में बी-4 एनएएससी कॉम्पलेक्स पूसा नई दिल्ली में रह रहे हैं।
यह भी पढ़ें: Army Agniveer Bharti: छलका अभ्यर्थियों का दर्द, बोले- जूतों में पानी भरा तो टूट गया अग्निवीर बनने का सपना
उन्होंने बताया कि वह सोमवार से कुलपति का चार्ज संभालेंगे। उनकी सबसे पहले प्राथमिकता कृषि विवि में खाली पड़े पदों को भरना है। बिना पद भरे कार्य नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि इसके बाद वह विवि को प्रतिवर्ष मिलने वाले 75 लाख रुपये के फंड को बढ़ाने का प्रयास करेंगे। पिछले 20 वर्षो से विवि को 75 लाख रुपये का फंड मिलता आ रहा है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह फंड काफी नहीं है।
यह भी पढ़ें: Ramlila में हदें पार: मंच पर मंदाकिनी बनी महिला, आयोजकों को नहीं आई शर्म, बुद्धिजीवी बोले- समाज के लिए घातक
उन्होंने बताया कि इसके अलावा कर्मचारियों, शिक्षकों की जो भी समस्याएं होंगी, उन्हें दूर किया जाएगा। विश्वविद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारा जाएगा और किसानों के प्रचार-प्रसार को बढ़ाया जाएगा। किसानों के हित में काम किया जाएगा, साथ ही विश्वविद्यालय को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए सभी को साथ लेकर काम किया जाएगा।