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प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में लापरवाही की इंतहा, बड़े कारोबारियों को बना दिया आयुष्मान का पात्र  

Tue, 03 Dec 2019 04:25 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 03 Dec 2019 04:25 PM IST
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Negligence in Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana,  businessmen are made
आयुष्मान भारत - फोटो : अमर उजाला

आयुष्मान भारत के तहत जन आरोग्य योजना के पात्र बनाने में लापरवाही की इंतहा हुई है। मेरठ शहर के बड़े कारोबारी भी इसमें शामिल कर दिए गए हैं, यानि उन्हें बीपीएल कार्डधारी (गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले) दर्शाया गया है। नाम बेहद चौंकाने वाले हैं, जैसे- सेठ दयानंद गुप्ता, रानी मिल वाले राहुल जैन, शिखा नर्सिंग होम चलाने वाले कारोबारी भूषण स्वरूप, उद्यमी पीडी मित्तल, सुशील भट्टे वाले, मेरठ कॉलेज प्रबंध समिति, लायंस क्लब के अध्यक्ष राम कुमार गुप्ता भी शामिल हैं।

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सराफा व्यापारियों के भी काफी नाम हैं, हंस कुमार जैन, भूषण स्वरूप, मुकेश कुमार, वीर जैन और खैराती लाल आदि हैं। इनमें अधिकांश कारोबारी जैन नगर, आनंद नगर, देव कालोनी और रेलवे रोड की पॉश कॉलोनियों के रहने वाले हैं।
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इन्हीं व्यापारियों का नाम सूची में शामिल होन के बाद सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने इसकी शिकायत सूबे के मुख्यमंत्री और चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री से की थी। स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक अपात्रों की कोई छंटनी नहीं कराई है। वर्ष 2011 की सर्वे सोशियो इकोनामिक कास्ट सेंसस (एसईसीएस) के तहत आयुष्मान योजना का आंकड़ा लिया गया था। इसमें गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को शामिल किया गया था। 

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सत्यापन करने की योजना फेल
स्वास्थ्य विभाग ने तय किया था कि करीब आधा दर्जन बिंदुुओं पर आयुष्मान के लाभार्थियों को परखेगा। जो पात्र नहीं हैं, उन्हें चिह्नित कर उनकी सूची शासन को भेजी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों कहना था कि इसमें करीब तीन से चार हजार लाभार्थी दायरे के बाहर हो जाएंगे। लेकिन यह योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी है। 

अपात्र वापस कर सकते हैं गोल्डन कार्ड : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार ने बताया कि जो अपात्र हैं और उनके गोल्डन कार्ड बन गए हैं, वे उसे सीएमओ कार्यालय में वापस कर सकते हैं। एक रिटायर्ड फौजी ने गोल्डन कार्ड वापस किया है।   

आयुष्मान मित्र ने बनाए 18 फर्जी गोल्डन कार्ड
आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अभी तक अमीरों और अधिकारियों के नाम जुड़ने के मामले ही सामने आ रहे थे, लेकिन इससे इतर एक और बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। आयुष्मान मित्र ने ‘खेल’ कर 18 फर्जी गोल्डन कार्ड बनवा दिए हैं। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुआ। अब इस मामले में कंकरखेड़ा थाने में एफआईआर की तैयारी की जा रही है। आयुष्मान मित्र ही योजना में नाम जुड़वा और हटवा सकता है।

नियम की आड़ में झांसी जिले में फर्जीवाड़ा किया गया और 196 नए लाभार्थी जोड़ दिए गए। जांच में खुलासा होने पर अन्य जिलों में भी नए लाभार्थियों की जांच के आदेश दिए गए। इसी के तहत मेरठ में यह जांच की जा रही थी। यहां नए 37 लाभार्थी जुड़े थे, जिसमें से 18 फर्जी निकले हैं।

फर्जीवाड़ा करने वाला यह आयुष्मान मित्र मोहकमपुर का रहने वाला शिव कुमार है, जो कंकरखेड़ा स्थित एक निजी चिकित्सालय में कार्यरत था। इसने अपने और अपने गांव के परिवार के ये फर्जी गोल्डन कार्ड बनवाए। जांच में खुलासा होने पर निजी चिकित्सालय प्रबंधन ने उसे नौकरी से निकाल दिया है। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने इस मामले में एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं। 

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