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रेवती नक्षत्र में होगा चैत्र नवरात्र का शुभारंभ, ये रहेगा शुभ मुहूर्त का समय

Fri, 20 Mar 2020 06:37 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 20 Mar 2020 06:37 PM IST
सार

नव संवत्सर पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था। युगों में प्रथम सतयुग का प्रारंभ भी चैत्र नवरात्रि की तिथि से ही हुआ था।

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Navratri 2020, Navratri starts from 25th March
नवरात्र (फाइल फोटो)

विस्तार

नव संवत्सर पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था। युगों में प्रथम सतयुग का प्रारंभ भी चैत्र नवरात्रि की तिथि से ही हुआ था। शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि पूजन और कलश स्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के पश्चात अथवा अभिजीत मुहूर्त में कर लेनी चाहिए। कलश स्थापना के साथ ही नवरात्र आरंभ हो जाता है। इसके अलावा इसी दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही हिंदू नव संवत्सर की भी शुरुआत होती है। चैत्र नवरात्रि में देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए इनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार मां दुर्गा ‘नाव की सवारी’ पर आएंगी। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिक साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि मार्कण्डेय पुराण में देवी के नौ रूपों के अवतरण और उनके द्वारा दुष्टों के संहार का पूरा वर्णन है। 

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मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि में माता का पाठ करने से देवी दुर्गा का विशेष आशीर्वाद मिलता है। इस बार 25 मार्च 2020 को रेवती नक्षत्र और ब्रह्म योग बन रहा है। भारतीय ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार नवरात्रि पूजन द्विस्वभाव लग्न में करना शुभ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मिथुन, कन्या, धनु और कुंभ राशि द्विस्वभाव राशि है। इसी लग्न में पूजा प्रारंभ करनी चाहिए। 25 मार्च प्रतिपदा के दिन रेवती नक्षत्र और ब्रह्म योग होने के कारण सूर्योदय के बाद और अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना शुभ होगा।
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क्यों बोया जाता है नवरात्रि में जौ
नवरात्रि में पूजा स्थल के पास जौ बोने की परंपरा होती है। इसके पीछे का कारण यह है कि जौ को ब्रह्म स्वरूप और पृथ्वी की पहली फसल माना गया है।

घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
पहला मुहूर्त: सुबह 6:10 से 10:20 तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 4 घंटे 9 मिनट की होगी। इसके पश्चात इस दिन अभिजीत मुहूर्त 11:58 से 12:49 मिनट तक है। जो ज्योतिष शास्त्र में स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया है। साथ ही मिथुन लगन में भी पड़ रहा है। इस लगन में पूजा और कलश स्थापना शुभ होगी। घट स्थापना 10:49 से 13:15 तक कर लें तो शुभ होगा।

नाव पर सवार होकर आएंगी मां
सूर्योदनी बसंतीय नवरात्र के पहले दिन झूलेलाल जयंती भी है। ज्योतिष वैज्ञानिक भारत ज्ञान भूषण के अनुसार इस बार नवरात्र पर देवी नाव पर सवार होकर आएंगीं और गज पर जाएंगीं।

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