{"_id":"6ac90aa94e9ad5ea210486a6","slug":"natural-farming-training-concludes-in-hastinapur-farmers-to-become-entrepreneurs-meerut-news-c-228-1-mwn1001-105601-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: हस्तिनापुर में प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संपन्न, किसान बनेंगे उद्यमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: हस्तिनापुर में प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संपन्न, किसान बनेंगे उद्यमी
विज्ञापन
कृषि विज्ञान केंद्र में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लेने वाले किसानों के साथ कृषि वैज्ञानिक
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र में पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। यह प्रशिक्षण पांच से नौ अक्तूबर तक चला, जिसमें 20 किसानों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना था।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. शुभम आर्य ने किया। मुख्य प्रशिक्षक और प्राकृतिक खेती के नोडल अधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार आर्य रहे। डॉ. वीणा यादव और डॉ. सोनिका ग्रेवाल ने भी इसके सफल संचालन में विशेष योगदान दिया। डॉ. शुभम आर्य ने किसानों को प्राकृतिक खेती की अवधारणा और तकनीकों की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने जीवामृत, बीजामृत और अन्य प्राकृतिक कृषि आदानों को तैयार करने की विधियां समझाईं। मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग और खेती की लागत कम करने पर जोर दिया गया। पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के बारे में भी बताया गया।
मुख्य प्रशिक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार आर्य ने प्राकृतिक खेती को कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसान गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद तैयार कर सकते हैं। इन उत्पादों का मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण किया जा सकता है। आकर्षक पैकिंग और ब्रांड निर्माण के बाद प्रभावी विपणन से बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। किसानों को इसे रोजगार और आय बढ़ाने के अवसर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
हस्तिनापुर। स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र में पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। यह प्रशिक्षण पांच से नौ अक्तूबर तक चला, जिसमें 20 किसानों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना था।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. शुभम आर्य ने किया। मुख्य प्रशिक्षक और प्राकृतिक खेती के नोडल अधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार आर्य रहे। डॉ. वीणा यादव और डॉ. सोनिका ग्रेवाल ने भी इसके सफल संचालन में विशेष योगदान दिया। डॉ. शुभम आर्य ने किसानों को प्राकृतिक खेती की अवधारणा और तकनीकों की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने जीवामृत, बीजामृत और अन्य प्राकृतिक कृषि आदानों को तैयार करने की विधियां समझाईं। मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग और खेती की लागत कम करने पर जोर दिया गया। पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के बारे में भी बताया गया।
विज्ञापन
मुख्य प्रशिक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार आर्य ने प्राकृतिक खेती को कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसान गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद तैयार कर सकते हैं। इन उत्पादों का मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण किया जा सकता है। आकर्षक पैकिंग और ब्रांड निर्माण के बाद प्रभावी विपणन से बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। किसानों को इसे रोजगार और आय बढ़ाने के अवसर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
विज्ञापन