राष्ट्रीय खेल दिवस पर विशेष: मेरठ के मैदानों पर कभी दद्दा ने दिखाया था जादू, अब दम तोड़ रही हॉकी
खेलो इंडिया के तहत कैलाश प्रकाश स्टेडियम में साढ़े पांच करोड़ की लागत से एस्ट्रोटर्फ मैदान तैयार किया जा रहा है। लेकिन निर्धारित समय सीमा से करीब डेढ़ साल ऊपर होने के बावजूद यूपीपीसीएल निर्माण कंपनी कार्य पूर्ण नहीं कर पाई है।
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मेरठ शहर के मैदानों पर कभी दद्दा यानि मेजर ध्यानचंद ने दस साल तक हॉकी का जादू दिखाया था। लेकिन वर्तमान में हॉकी बुरे दौर से गुजर रही है। कभी यहां हॉकी के 18 क्लब थे, लेकिन आज एक भी नहीं। यहीं से कभी ओलंपियन एमपी सिंह और जेम्स रोमियो ने चमक बिखेरी।
वर्तमान में करीब 150 खिलाड़ी ही हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें एनएएस मैदान पर 50 बालिकाएं, जबकि बीएवी, विजन विद्यापीठ, एसडी सदर और कैलाश प्रकाश स्टेडियम में खिलाड़ियों की संख्या करीब 100 ही है। टोक्यो में मिली कामयाबी से खेल के अच्छे दिनों की उम्मीद है। कभी यहां प्रशिक्षण लेने वाली ओलंपियन वंदना कटारिया भी वर्तमान में टीम इंडिया का हिस्सा है।
कब तक बिछेगा एस्ट्रोटर्फ?
खेलो इंडिया के तहत कैलाश प्रकाश स्टेडियम में साढ़े पांच करोड़ की लागत से एस्ट्रोटर्फ मैदान तैयार किया जा रहा है। लेकिन निर्धारित समय सीमा से करीब डेढ़ साल ऊपर होने के बावजूद यूपीपीसीएल निर्माण कंपनी कार्य पूर्ण नहीं कर पाई है। तीन प्रोजेक्ट मैनेजर बदल चुके हैं।
हाल में ही कार्य गाजियाबाद इकाई से मेरठ इकाई को दे दिया गया है। लेकिन कार्य की रफ्तार नहीं बढ़ी। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी गदाधर बारीकी ने ने बताया कि कंपनी अधिकारियों से बातचीत कर कार्य मे तेजी के के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने जल्द कार्य पूर्ण करने का आश्वासन दिया है।
स्कूली स्तर पर सुधार से निखरेगी हॉकी
मेरठ से हॉकी हॉस्टल खत्म हो गया। पुरुष वर्ग में एक भी क्लब नहीं बचा है। टोक्यो ओलंपिक के बाद बच्चों में हॉकी को लेकर दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद है। स्कूली स्तर पर छात्रों को हॉकी से जोड़ना होगा। - प्रदीप चिन्योटी, कोच
हर सप्ताह कराएंगे हॉकी टूर्नामेंट
स्कूल प्रबंधन कमेटियों को हॉकी को बढ़ावा देने के लिए आगे आना होगा। कोच को अच्छा वेतन व खिलाड़ियों को सुविधा दें। - जोगिंदर सिंह, हॉकी कोच
यह हॉकी के बदलाव का समय
हॉकी को लेकर रुझान बढ़ा है। इससे अच्छा समय बदलाव के लिए नहीं हो सकता है। स्कूलों में कोच को अच्छा वेतन देने का प्रावधान करना चाहिए। - एहसानुल हक, कोच, बीएवी कॉलेज
जमीनी स्तर पर होना चाहिए काम
जमीनी स्तर पर भी हॉकी की सूरत बदलनी होगी। यही सही समय है, जब देश में हॉकी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। - प्रवीण कुमार शर्मा, पूर्व हॉकी खिलाड़ी