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तीन तलाक कानून का दिखा असर, नसीमा का फिर से बस गया घर, शौहर ने मानी ये शर्त

Sat, 03 Aug 2019 08:01 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 03 Aug 2019 08:01 PM IST
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Naseema of Saharanpur will be with her husband again after Triple Talaq bill passed
अधिवक्ता फरहा फैज के साथ नसीमा अपने पति और बच्चों के साथ - फोटो : अमर उजाला

तीन तलाक का कानून बनते ही पति अपनी पत्नी को लेने के लिए ससुराल पहुंच गया। पत्नी को न सिर्फ अधिवक्ता के समक्ष समझौता नामा लिखकर दिया, बल्कि लगभग 750 वर्ग फुट जमीन पत्नी के नाम करने का भी आश्वासन दिया। कानून बनने के बाद इस नई पहल को लेकर चर्चा बनी हुई है। 

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सहारनपुर में कुतुबशेर के खुंगर कॉलोनी निवासी नसीमा का निकाह वर्ष 2015 में विकास नगर उत्तराखंड के हरबर्टपुर निवासी मो. अली के साथ हुआ था। उनके यहां जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ। नसीमा के अनुसार उसका पति एवं ससुराल के लोगों ने कुछ समय बाद ही उसके साथ मारपीट एवं दहेज के लिए उत्पीड़न शुरू कर दिया। लगभग आठ माह पूर्व उसे मारपीट कर तलाक देने की बात कहते हुए घर से निकाल दिया। तब से वह अपने मायके में आकर रहने लगी। मामले में समझौते के लिए कई बार पति और ससुरालियों को उसके परिजनों ने बुलाया लेकिन वे आने के लिए तैयार नहीं हुए। उसे पता चला कि उसका पति एवं ससुराल के लोग दूसरी शादी की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज के साथ जाकर एसएसपी को प्रार्थना पत्र दिया और कार्रवाई की मांग की। 
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अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि इसी दौरान तीन तलाक के विरुद्ध कानून बन गया। जिसके बाद नसीमा ने पति एवं ससुरालियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी कर ली। जब इस बात का पता ससुरालियों को चला तो उन्होंने तुरंत नसीमा और उसके परिजनों से संपर्क किया और नसीमा को घर ले जाने के लिए तैयार हो गए।

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वहीं शनिवार को अधिवक्ता से समझौता नामा तैयार कराया गया। अधिवक्ता की मौजूदगी में नसीमा के पति मो. अली और उसके परिजनों ने हस्ताक्षर किया। नसीमा को शर्तों पर घर ले जाया गया। यही नहीं मो. अली को पत्नी नसीमा और उसके बच्चों को अलग मकान में रखने के साथ ही पांच माह में 750 वर्ग फुट जमीन भी नसीमा के नाम करने का लिखित में आश्वासन दिया। 

मो. अली का इस मामले में कहना है कि वह और उसका परिवार नहीं चाहता कि किसी प्रकार से कोर्ट कचहरी के चक्कर काटे। उनमें आपस में समझौता हो गया है और वह अपनी पत्नी एवं बच्चों को लेकर जा रहा है।

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