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Meerut News: गीत-संगीत के साथ श्रीराम-रावण युद्ध का प्रसंग सुनाया
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सरधना (मेरठ)। गांव भदौड़ा में श्रीराम कथा के नौवें दिन साध्वी नीरज ने गीत-संगीत के साथ श्रीराम-रावण के युद्ध का प्रसंग सुनाया। उन्होंने ने राम हनुमान मिलन, लंका यात्रा, सेतु लीला, रामेश्वरम की स्थापना, श्री राम रावण युद्ध, राज्याभिषेक सहित अन्य प्रसंग सुनाए तो श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
साध्वी नीरज ने लंका से हनुमान जी के लौटने के बाद सागर का अहंकार समाप्त करने से लेकर सेना सहित लंका में पहुंचने तक का वृतांत सुनाया। उन्होंने बताया कि नल-नील की मदद से सागर पर सेतु बनाने के बाद श्रीराम की सेना ने भयंकर युद्ध के बाद रावण का वध किया। साध्वी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की जीवन गाथा हमारा पथ-प्रदर्शन भी कर रही है। भरत ने चौदह वर्ष तक भगवान श्रीराम की खड़ाऊं सिंहासन पर रखकर राज-पाठ संभाला और अयोध्या वापस आने पर श्रीराम को सौंप दिया। कथा में कहा गया कि समाज को राम भक्त हनुमान से निस्वार्थ भक्ति की सीख लेनी चाहिए।
कथा में संजीव मलिक, पप्पू मलिक, मंगलसैन प्रधान, गुड्डी देवी, अनमोल, कृष्णपाल प्रधान, नेपाल सिंह, डाॅ. मनोज सिवाच, बिजेंद्र मुखिया, तेजवीर सिंह, आनंदपाल मलिक, अमित शर्मा, नीलम, सतबीरी, राधिका, महेन्द्र विश्वकर्मा, कृष्णपाल, पिंटू, राजेंद्र, योगी आदि रहे।
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साध्वी नीरज ने लंका से हनुमान जी के लौटने के बाद सागर का अहंकार समाप्त करने से लेकर सेना सहित लंका में पहुंचने तक का वृतांत सुनाया। उन्होंने बताया कि नल-नील की मदद से सागर पर सेतु बनाने के बाद श्रीराम की सेना ने भयंकर युद्ध के बाद रावण का वध किया। साध्वी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की जीवन गाथा हमारा पथ-प्रदर्शन भी कर रही है। भरत ने चौदह वर्ष तक भगवान श्रीराम की खड़ाऊं सिंहासन पर रखकर राज-पाठ संभाला और अयोध्या वापस आने पर श्रीराम को सौंप दिया। कथा में कहा गया कि समाज को राम भक्त हनुमान से निस्वार्थ भक्ति की सीख लेनी चाहिए।
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कथा में संजीव मलिक, पप्पू मलिक, मंगलसैन प्रधान, गुड्डी देवी, अनमोल, कृष्णपाल प्रधान, नेपाल सिंह, डाॅ. मनोज सिवाच, बिजेंद्र मुखिया, तेजवीर सिंह, आनंदपाल मलिक, अमित शर्मा, नीलम, सतबीरी, राधिका, महेन्द्र विश्वकर्मा, कृष्णपाल, पिंटू, राजेंद्र, योगी आदि रहे।
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