फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   nahaan khaaye ke saath

नहाय खाय के साथ छठ पर्व शुरू   

Wed, 25 Oct 2017 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 25 Oct 2017 12:25 AM IST
विज्ञापन
nahaan khaaye ke saath
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
छठ पर्व की शुरूआत मंगलवार को नहाय-खाय के साथ हुई। व्रत रखने वाली महिलाओं ने शाम को स्नान के बाद रोटी, चने की दाल और लौकी की सब्जी का भोजन किया। वहीं बिस्तर का त्याग करके जमीन पर चटाई पर आराम किया। आज खरना की विधि की जाएगी।
विज्ञापन

 महानगर में रहने वाले पूर्वांचल के परिवारों ने महापर्व के पहले दिन विधि विधान के साथ व्रत की शुरूआत की। मोदीपुरम, शताब्दीनगर, ब्रह्मपुरी, साकेत, मंगलपांडेनगर, जेलचुंगी, गांधी आश्रम आदि इलाकों में पर्व को लेकर खुशी का माहौल रहा। वहीं पल्लवपुरम में परिवार के अन्य सदस्यों ने व्रतियों के भोजन के बाद ही भोजन ग्रहण किया। कार्तिकेय मैथिल संरक्षक, ललित पिंडारुच अध्यक्ष, विजय मिश्रा उपाध्यक्ष, इंद्रकुमार कोषाध्यक्ष, कालीचरण संयोजक, संजीव झा सचिव, दीपक शांडिल्य मंत्री, प्रोफेसर पीएस झा वरिष्ठ सदस्य, अजय कुमार, एसएनझा, पंडित श्रवण झा, एचके झा, बिजेंद्र ठेकेदार, राहुल करमौली, पंडित भक्ति नाथ, पंडित राजू, पदमनाभझा, डॉ. एसके झा, डॉ. एमएम झा, डॉ. जीके मिश्रा, शंकर झा, उग्रनाथ झा शामिल रहे। व्रतियों में चांद देवी, सुनैना, ललिता, साधना, रुबी, कुमकुम, आरती, ज्योति, मंजु पिंडारुच, कोमल, रंजना यादव, डौली चौहान, एकता चौहान एवं भावना शामिल है। 
विज्ञापन


आज होगी खरना विधि
छठ पर्व के दूसरे दिन खरना की विधि की जाती है। खरना का मतलब है पूरे दिन का उपवास। व्रती इस दिन जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करता। शाम होने पर गन्ने का जूस या गुड़ के चावल या गुड़ की खीर का प्रसाद बना कर बांटा जाता है। वहीं तीसरे दिन पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजा की सामग्रियों को लकड़ी के डाले में रखकर घाट पर ले जाते हैं। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर आकर सारा सामान वैसी ही रख दिया जाता है। रात के समय छठ माता के गीत गाए जाते हैं और व्रत कथा सुनी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

चौथे और अंतिम दिन सुबह सूर्य निकलने से पहले ही घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद घाट पर छठ माता को प्रणाम कर उनसे संतान रक्षा का वर मांगा जाता है। अर्घ्य देने के बाद घर लौटकर सभी में प्रसाद वितरित किया जाता है। स्वयं भी प्रसाद खाकर व्रत खोला जाता है। 


छठ पर्व की मान्यता
मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस महाव्रत को निष्ठा भाव से विधिपूर्वक संपन्न करता है वह संतान सुख से कभी अछूता नहीं रहता है। इस महाव्रत के फलस्वरूप व्यक्ति को न केवल संतान की प्राप्ति होती है बल्कि उसके सारे कष्ट भी समाप्त हो जाते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed