पांच सौ वर्ष बाद पुनर्जीवित हुई नागिन नदी, स्वच्छ जलधारा ने बढ़ाई लोगों की उत्सुकता, मान रहे चमत्कार
गांव के बुजुर्ग बताते हैं लगभग 500 वर्ष पूर्व नागिन नदी का उद्गम खतौली क्षेत्र के ही गांव अंतवाड़ा से हुआ था। नदी अपने उद्गम अंतवाड़ा से होते हुए याहियापुर, पलड़ी, जसौला, जावन, लावड़ होते हुए बुलंदशहर से कुछ आगे गंगा नदी में समागम हो रहा है। मेरठ से आगे निकलते ही इसका नाम काली नदी पड़ा। बुलंदशहर में आज भी नदी का बावन दरा मौजूद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नमामि गंगे की योजना में इस नागिन नदी को शामिल किया गया था। नागिन नदी को पुनर्जीवित करने की पहल नीर फाउंडेशन के निदेशक रमन कांत त्यागी के द्वारा की गई।
रमन कांत त्यागी ने प्रशासनिक अधिकारियों व ग्रामीणों की मदद से नागिन नदी को पुनर्जीवित किया है। नागिन नदी के उद्गम स्थल को देखने के लिए गैर जनपदों से भी लोग देखने आ रहे हैं। गांव निवासी राजबीर गुर्जर एडवोकेट ने बताया कि उद्गम स्थल को गैर जनपदों के लोग देखने के लिए आ रहे हैं।