भाकियू ने 6 घंटे तक कब्जाया रेलवे ट्रैक, 10 ट्रेनें हुईं प्रभावित, गन्ना भुगतान पर मिला आश्वासन
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मुजफ्फरनगर में डीएम द्वारा बुलाई गई भाकियू नेताओं और चीनी मिल प्रबंधकों की बैठक में मिलों के जीएम के नहीं पहुंचने से नाराज किसानों ने रेलवे स्टेशन पहुंच ट्रैक जाम कर दिया। इसके बाद जो ट्रेन जहां थी, उसे वहीं रोक दिया गया। छह घंटे तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में वार्ता चलती रही, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। बाद में डीएम, एसएसपी और चीनी मिलों के जीएम रेलवे स्टेशन पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को 10 फरवरी तक गन्ना मूल्य भुगतान का आश्वासन दिया। जिसके बाद धरना खत्म कर दिया गया। शाम सात बजे रेलवे ट्रैक खोला गया।
वहीं गन्ना भुगतान को लेकर भारतीय किसान यूनियन द्वारा रेलवे स्टेशन पर ट्रैक पर कब्जा किए जाने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाली दस ट्रेन प्रभावित हुई, जिनमें से कई को अन्य ट्रैक से निकाला गया, जबकि जालंधर इंटरसिटी को रद्द कर दिया गया।
भाकियू कार्यकर्ता और किसान मंगलवार दोपहर करीब एक बजे स्टेशन पर पहुंचे और ट्रैक पर कब्जा कर बैठ गए। जिसके बाद कंट्रोल रूम को सूचना देकर ट्रेनों को मुजफ्फरनगर न भेजने को कहा गया। किसानों के आंदोलन के कारण ट्रेनों को निकटवर्ती स्टेशनों पर रोक दिया गया। आंदोलन के कारण शाम सात बजे तक रेल संचालन ठप रहा।
छह घंटे तक दिल्ली-मेरठ-सहारनपुर मार्ग पर ट्रेनों के पहिये थमे रहे। इस अवधि में इस मार्ग से गुजरने वाले 10 ट्रेनें प्रभावित हुईं। दिल्ली से जालंधर जाने वाली इंटरसिटी (सुपर) को रद्द कर दिया गया। दिल्ली से जम्मूतवी जाने वाली शालीमार एक्सप्रेस को वाया शामली से, सहारनपुर से चलने वाले नौचंदी लिंक को वाया रुड़की से मुरादाबाद भेजा गया।
दिल्ली से देहरादून जाने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस का भी मार्ग बदल कर उसे वाया हापुड़, मुरादाबाद से निकाला गया। अन्य ट्रेन भी प्रभावित हुई। देहरादून-ब्रांदा एक्सप्रेस को देवबंद, हरिद्वार से अहमदाबाद जाने वाली योगा एक्सप्रेस को टपरी, कालका पैसेंजर को बामनहेड़ी, ऋषिकेश-दिल्ली पैसेंजर को देवबंद रोके रखा गया। दिल्ली-अंबाला पैसेंजर मंसूरपुर, दिल्ली-अंबाला इंटरसिटी पहले मंसूरपुर फिर जड़ौदा, दिल्ली-सहारनपुर पैसेंजर मेरठ में खड़ी रही।
चार दिन पहले भाकियू ने दो चीनी मिल प्रबंधकों तितावी के नागेंद्र चौधरी और खाईखेडी के सईम अंसार को कलक्ट्रेट में नाजिर के कार्यालय में बंधक बना लिया था। किसानों का 21 करोड़ का भुगतान करने के बाद उन्हें छोड़ा गया। वार्ता में यह तय हुआ था कि जिले की सभी चीनी मिलों के जीएम मंगलवार को डीएम की मौजूदगी भाकियू प्रतिनिधिमंडल से वार्ता करेंगे।
मंगलवार को कलक्ट्रेट में होने वाली बैठक के लिए नियत समय पर भाकियू नेता तो पहुंच गए, लेकिन चीनी मिलों की ओर से केवल टिकौला और मोरना चीनी मिल के जीएम ही बैठक में पहुंचे। टिकौला किसानों का भुगतान कर चुकी है और मोरना सहकारी चीनी मिल है। बाकी छह चीनी मिलों के जीएम कलेक्ट्रेट में पहुंचने के बाद भी किसानों की भीड़ देखकर बैठक में नहीं पहुंचे। इस पर भाकियू नेता राकेश टिकैत, जिलाध्यक्ष राजू अहलावत नाराज हो गए और उन्होंने किसानों से कहा कि रेलवे ट्रैक जाम करों, ये लोग वहीं पर आएंगे। किसान दोपहर डेढ़ बजे रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए और वहां भाकियू का बैनर और झंडा गाड़ दिया।
किसान रेलवे ट्रैक पर धरना देकर बैठ गए। किसानों के रेलवे ट्रैक पर बैठने की सूचना पर रेलवे में हड़कंप मच गया। इस संबंध में रेलवे कंट्रोल रूम को जानकारी दी गई। जो ट्रेन मार्ग में जहां थी उसे पास के स्टेशन पर रोक दिया गया। तीन घंटे की लगातार कसमकश के बाद भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने घोषणा कर दी कि वह ट्रैक को अनिश्चितकाल के लिए बंद रखेंगे और डीएम और एसएसपी के ऑफिस पर भी तालाबंदी की जाएगी। एडीएम प्रशासन अमित सिंह, एसपी सिटी ओमवीर सिंह, एसपी क्राइम आरबी चौरसिया सहित समस्त अफसर भाकियू नेताओं समझाने में लगे रहे, लेकिन बात नहीं बनी।
शाम करीब छह बजे डीएम राजीव शर्मा और एसएसपी सुधीर कुमार सिंह रेलवे स्टेशन पहुंचे और किसानों से वार्ता की। किसानों की मांग पर सभी चीनी मिलों के जीएम को रेलवे स्टेशन बुलाया गया। किसानों को 10 फरवरी तक गन्ना मूल्य भुगतान का आश्वासन दिया। तब करीब सात बजे ट्रैक खोला गया। भाकियू नेता धर्मेंद्र मलिक, मंडल अध्यक्ष ओमपाल मलिक, अशोक घटायन, विकास शर्मा, विपिन, प्रदीप, मांगेराम त्यागी, नवीन राठी, मनोज सहरावत, योगेंद्र राठी आदि मौजूद रहे।
मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर भाकियू कार्यकर्ताओं के आंदोलन चलते दिल्ली से आने वाली सभी ट्रेनों को मेरठ स्टेशन पर ही रोक दिया गया। खतौली रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी ट्रेन को रोकी तथा मंसूरपुर में पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया गया। रेल यातायात ठप होने से रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के इंतजार में यात्री परेशान रहे। गांव छछरपुर के सेवाराम ने बताया कि उसको सहारनपुर में किसी काम से जाना था, ट्रेन यातायात ठप होने से वह नहीं जा सका।
गांव चलसीना निवासी अक्षय ने बताया कि उसको दिल्ली जाना था। इसी गांव के सतेंद्र पाल ने बताया कि उसे राजस्थान जाना था। गांव भैंसी निवासी जसबीर ने बताया कि उसको मेरठ में डॉक्टर से स्वास्थ्य परीक्षण कराना था। उसने डॉक्टर से समय भी लिया था। ट्रेन यातायात ठप होने से वह मेरठ नहीं जा सका। जानसठ के गांव सादपुर निवासी कस्तूरी ने बताया कि उसको अपने बच्चों को साथ लेकर मेरठ जाना था। देर शाम तक कस्तूरी ट्रेन की इंतजार में बच्चों के साथ स्टेशन पर ठंड में परेशान रहीं।
उधर, भाकियू के आंदोलन के कारण दिल्ली-अंबाला पैसेंजर ट्रेन को मंसूरपुर स्टेशन पर रोक दिया गया। यात्री बावरी निवासी नरेश कुमार और उसकी पत्नी मुन्नी को मुजफ्फरनगर जाना था, लेकिन 6 बजे तक भी जब ट्रेन नहीं चलीं, तो अपने सामान को लेकर रोडवेज बस से मुजफ्फरनगर रवाना हो गए। रोहाना निवासी रमेश और उसकी पत्नी हरप्यारी तीन घंटे के इंतजार के बाद बस से अपने गांव के लिए रवाना हो गए। रेल यातायात ठप होने से यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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