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मुजफ्फरनगर दंगा: सीएम योगी के कदम से जगी न्याय की उम्मीदें

Fri, 23 Mar 2018 04:23 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, जगेंद्र उज्ज्वल, मुजफ्फरनगर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, जगेंद्र उज्ज्वल, मुजफ्फरनगर Updated Fri, 23 Mar 2018 04:23 PM IST
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Muzaffarnagar riots: hopes for justice by the steps of CM Yogi
सीएम योगी आदित्यनाथ

मुजफ्फरनगर दंगे के मुकदमों को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे है। दर्ज मामलों में ऐसे मुकदमों की संख्या भी कम नहीं है, जिसमें रंजिश के आधार पर लोगों को फंसा दिया गया। सार्वजनिक मंचों पर यह आवाज पिछले पांच साल से उठती रही है। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद फर्जी मुकदमों से मुक्ति की आस जगी थी। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान की पहल पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुकदमों की हकीकत को जानने का फैसला लिया। योगी के कदम से विपक्षी सियासी पार्टियों में हलचल मची है।

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सात सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर और शामली में भड़के उन्माद में इंसानियत शर्मसार हुई थी। सदियों से बना सामाजिक तानाबाना छिन्न-भिन्न हो गया था। दंगे से हिंदू और मुस्लिमों में खिची खाई अभी तक पूरी तरह से नहीं भर पाई है। हजारों लोग अपने पैतृक गांव को छोड़ कर दूसरी जगहों पर विस्थापित हो चुके हैं। शाहपुर, बुढ़ाना, फुगाना और भौराकलां के गांव में आगजनी और हिंसा के निशान दहशत को बयां करते हैं। बेघर दंगा पीड़ितों की छपार, बसीकलां, लोई सराय, भलवा में नई बस्तियां बन गई है। विस्थापितों के दर्द के साथ दंगे के मुकदमों में फर्जी तरीके से फंसा दिए गए लोगों की भी अपनी पीड़ा थी। कहीं रंजिश, तो कहीं मुआवजे के फेर में बेगुनाहों पर दंगे के मुकदमे मढ़ दिए गए। करीब पांच साल से मुकदमों की दुश्वारियां झेल रहे लोगों ने न्याय की आवाज उठाई, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। खाप चौधरियों ने अपने स्तर से बात शासन तक पहुंचाई। 
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पढ़ें : मुजफ्फरनगर दंगा: भाजपा नेताओं से मुकदमे वापस लेने की तैयारी में योगी सरकार
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Muzaffarnagar riots: hopes for justice by the steps of CM Yogi
फाइल फोटो

मुजफ्फरनगर और शामली जिले में कई पंचायतें हुई, जिनमें मुकदमों में फंसे बेगुनाहों को मुक्त करने की मांग रखी गई। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान की पहल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक प्रतिनिधिमंडल को लखनऊ में आमंत्रित किया। पांच फरवरी को एनेक्सी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से सुना। आगजनी, लूट, डकैती, बलवा, तोड़फोड़, प्रदर्शन के मामलों में फंसे ग्रामीणों को न्याय देने की मांग रखी गई। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र सिंह लिसाढ़, लांक के थांबेदार राजवीर सिंह, अहलावत खाप के चौधरी गजेंद्र सिंह अहलावत, जाट महासभा के राष्ट्रीय सचिव सुभाष चौधरी तथा शामली जाट महासभा के अध्यक्ष प्रताप चौधरी आदि ने सांसद डॉ बालियान के साथ सीएम के समक्ष पीड़ितों का दर्द रखा। सीएम ने दर्ज मुकदमों की सत्यता को जांचने और मौजूदा वस्तुस्थिति की रिपोर्ट तलब करने का निर्णय ले लिया है। योगी सरकार के इस कदम पर विपक्षी पार्टियों में हलचल मची है।

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