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मुजफ्फरनगर: चक्काजाम को लेकर पुलिस अलर्ट, तीन कंपनी पीएसी, आरआरएफ व अतिरिक्त पुलिस बल मुस्तैद

Fri, 05 Feb 2021 12:28 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 05 Feb 2021 12:28 AM IST
सार

- चक्का जाम के प्वाइंट्स पर तैनात होगा फोर्स, कानून व्यवस्था सर्वोपरि

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Muzaffarnagar: Police alert regarding Chakkajam, three company PAC, RRF and additional police force deployed
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर कृषि कानूनों के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के छह फरवरी शनिवार को प्रस्तावित चक्का जाम को लेकर पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया है। जिले को चार जोन व 25 सेक्टर में बांटकर पुलिस व्यवस्था की गई है, जिसके लिए तीन कंपनी पीएसी, एक कंपनी आरआरएफ और अतिरिक्त पुलिस बल की ड्यूटी लगाई गई है।
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कृषि कानूनों के विरोध में भाकियू ने आगामी छह फरवरी को जिले में 10 स्थानों पर चक्का जाम करने की घोषणा की हुई है। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुए उपद्रव के चलते इस बार पुलिस-प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
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एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि चक्का जाम को देखते हुए जिले को चार जोन व 25 सेक्टर में बांटकर पुलिस फोर्स की तैनाती की जाएगी। इसके लिए तीन कंपनी पीएसी और एक कंपनी आरआरएफ को जिले में बुलाया गया है। वहीं, करीब दो हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को भी ड्यूटी पर लगाया जाएगा।
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इसके साथ ही सभी एएसपी, सीओ और थाना प्रभारियों को भी क्षेत्र में लगातार गश्त पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि हर हाल में कानून व्यवस्था को कायम रखना पहली प्राथमिकता है। चक्का जाम के दौरान आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े, इसके लिए भी रूट डायवर्जन समेत अन्य इंतजाम किए जा रहे हैं।

की जा रही किसान नेताओं से वार्ता
पुलिस-प्रशासन जहां एक ओर प्रस्तावित चक्का जाम के चलते कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में लगा है, वहीं इसे टालने के भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत, प्रशासन द्वारा जनपद के प्रमुख किसान नेताओं के साथ ही भाकियू पदाधिकारियों से भी लगातार वार्ता की जा रही है। हालांकि, चक्काजाम वापस लिए जाने के आसार कम ही हैं।

दस स्थानों पर सुबह 11 से दोपहर दो बजे तक रहेगा जाम
कृषि कानूनों के विरोध में भाकियू द्वारा हाईवे सहित जनपद के दस प्रमुख मार्गों पर सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक चक्का जाम किया जाएगा। भाकियू जिलाध्यक्ष धीरज लाटियान ने बताया कि छह फरवरी को जिन मार्गों व स्थानों पर चक्का जाम किया जाएगा, उसके लिए रणनीति बना ली गई है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली-दून हाईवे पर खतौली ब्लॉक में नावला कोठी, पुरकाजी ब्लॉक में भूराहेड़ी चेकपोस्ट व सदर ब्लॉक में रामपुर तिराहा पर चक्का जाम किया जाएगा। वहीं, बुढ़ाना ब्लॉक में मेरठ-करनाल हाईवे के बायवाला चेकपोस्ट, पानीपत- खटीमा राजमार्ग पर बघरा ब्लॉक के लालूखेड़ी बस स्टैंड, दिल्ली-पौड़ी राजमार्ग पर मीरापुर में मोंटी तिराहा और सहारनपुर-मुजफ्फरनगर स्टेट हाईवे 59 पर रोहाना पुलिस चौकी पर चक्का जाम होगा। इनके अलावा, थानाभवन मार्ग पर चरथावल पुलिस चौकी, मोरना में चौधरी चरणसिंह चौक और शाहपुर में थाने के सामने तिराहे पर जाम लगाया जाएगा। जिलाध्यक्ष ने बताया कि एंबुलेंस, स्कूल बस आदि जरुरी वाहनों को नहीं रोक जाएगा।

गाजीपुर बॉर्डर पर खाद्य सामग्री भेजी
गाजीपुर बॉर्डर दिल्ली में चल रहे किसानों के धरने को समर्थन देते हुए गांव बोपाडा के ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से एकत्र कर खाद्य सामग्री गाजीपुर बॉर्डर भेजी। इस अवसर पर किसानों का कहना था कि जब तक किसान विरोधी बिल वापस नहीं हो जाते, उनका इसी तरह से आंदोलन को समर्थन जारी रहेगा। इस अवसर पर विकास कुमार, शोभित ,संजय अहलावत, पिंटू, चरण सिंह, राहुल, सुरेश, चांद ,गोपाल, मोनू आदि किसान रहे।

राशन लेकर गाजीपुर बॉर्डर जा रहे किसान
कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए क्षेत्र के किसान बड़ी संख्या में राशन लेकर जा रहे हैं। दो माह से अधिक समय से चल रहे किसान आंदोलन को लेकर भाकियू पदाधिकारी गांव-गांव बैठक कर किसानों को कृषि कानूनों के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए उनसे किसान आंदोलन में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं। इसके साथ ही गांव-गांव बैठक कर किसान आंदोलन में शामिल किसानों के लिए राशन ले जाने की खातिर धन संग्रह भी किया जा रहा है।

भाकियू ब्लॉक अध्यक्ष विपिन बालियान ने बताया कि बृहस्पतिवार को गांव सोरम से किसान दाल का हलवा व फल के साथ ही राशन सामग्री लेकर गाजीपुर बॉर्डर के लिए रवाना हुए हैं। वहीं, जिला प्रवक्ता नीटू दुल्हेरा ने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार पिछले छह साल में पहली बार किसान आंदोलन के चलते बैकफुट पर आई है। यदि केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापस नहीं लिए, तो किसान आंदोलन को ओर तेज किया जाएगा।

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