मुजफ्फरनगर कवाल कांड: पढ़िए- अदालत के फैसले पर क्या बोले देवबंदी उलमा
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मुजफ्फरनगर दंगों में बुधवार को अदालत द्वारा एक पक्ष के लोगों को दोषी करार दिए जाने के मामले में उलमा का कहना है कि मुजरिम किसी भी धर्म के हो अगर उसने कुछ गलत किया है तो उसे सजा मिलनी चाहिए।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि मुल्क के अंदर कहीं भी कोई ऐसा काम करता है जो हिंदुस्तान के दस्तूर (संविधान) के खिलाफ है और उससे अमनो अमान खराब होता है उस पर अदालत कोई फैसला करती है तो उस पर हर शहरी को भरोसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गलत काम करने वाला हिंदू, मुस्लिम, सिख या फिर ईसाई, अगर वो मुजरिम है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। इसे धर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। साथ ही कहा कि इस तरह के मामलों में लंबा समय गुजरना भी जुर्म है इसलिए अदालत को चाहिए कि वो जल्द से जल्द इंसाफ करे।
मदरसा दारुल उलूम फारुकिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी का कहना है कि अदालत पर हमें पूरा भरोसा है। जुर्म करने वाला कोई भी है अगर उसने हकीकत में कुछ गलत किया है तो उसे उसकी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत सबूतों की बुनियाद पर फैसले करे न की मजहब की बुनियाद पर। कहा कि भारतीय संविधान सबके लिए बराबर है। इस लिहाज से मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों को इंसाफ भी बराबर का मिलना चाहिए। किसी के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए।
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