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कवाल कांड: क्यों भड़का था मुजफ्फरनगर दंगा? जानें- सबसे बड़ी वजह

Sat, 09 Feb 2019 12:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 09 Feb 2019 12:31 AM IST
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Muzaffarnagar Kawal Kand 2013, Why did Muzaffarnagar riot
मुजफ्फरनगर कवाल कांड - फोटो : अमर उजाला

मुजफ्फरनगर में कवाल कांड की वीडियो क्लिप भी दंगा सुलगने की बड़ी वजह बनी थी। जिस फेसबुक एकाउंट से यह वीडियो शेयर की गई थी, उस एकाउंट का देश की जांच एजेंसियां और आईआईसी भी पता नहीं लगा पाईं। अमेरिका के फेसबुक मुख्यालय ने भी एकाउंट आईडी की डिटेल देने से इंकार कर दिया था। सरधना के भाजपा विधायक संगीत सोम पर इसी वीडियो को लाइक करने पर रासुका के तहत कार्यवाही की गई थी।

Muzaffarnagar Kawal Kand 2013, Why did Muzaffarnagar riot
कवाल कांड

जानसठ कोतवाली क्षेत्र के कवाल गांव में 27 अगस्त 2013 को मलिकपुरा के सचिन एवं फुफेरे भाई गौरव का चौराहे पर कत्ल कर दिया था। पांच साल चली केस की सुनवाई के बाद मुकदमे के सभी सात आरोपियों को एडीजे कोर्ट संख्या-7 ने हत्या का दोषी करार दे दिया है, जिन्हें शुक्रवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। और सभी आरोपियों पर दो-दो लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

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कवाल कांड

कवाल कांड के बाद भड़के मुजफ्फरनगर दंगे की एक वजह फेसबुक पर वायरल हुई वह कथित वीडियो भी बनी, जिसे सचिन और गौरव की निर्मम हत्या का वीडियो बता कर प्रचारित किया गया। सोशल मीडिया पर वीडियो के शेयर होने से आक्रोश बढ़ता गया और हिंसा की चिंगारी ने पूरे पश्चिम को चपेट में ले लिया। कथित वीडियो से फैली भ्रांति को रोकने के लिए शासन और प्रशासन को हरकत में आना पड़ा। इसी बीच शुभम नाम की फेसबुक आईडी से सरधना के भाजपा विधायक संगीत सोम को यह कथित वीडियो शेयर की गई, जिसे उन्होंने लाइक किया। मामले से सोम के जुड़ते ही सियासत गरमा गई।

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कवाल कांड

शासन के आदेश पर पुलिस ने विधायक संगीत सोम और शुभम के खिलाफ शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में विधायक सोम को गिरफ्तार कर जेल भेजने के साथ ही उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगा दिया। तत्कालीन सपा सरकार के निर्देश पर सोम को जिला कारागार से उरई की जेल में भेज दिया गया। पुलिस और एसआईसी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन सेल) ने कथित वीडियो की जांच पड़ताल शुरू की। चार साल की मशक्कत के बाद भी यह वीडियो क्लिप किस एकाउंट से शेयर की गई थी, इसका पता नहीं चल सका।

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कवाल कांड

वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय की मदद से जांच को एसआईसी ने फेसबुक मुख्यालय अमेरिका को मेल भेजी। इंटरपोल की भी मदद ली गई, लेकिन फेसबुक मुख्यालय ने शुभम के एकाउंट की व्यक्तिगत जानकारी देने से इंकार कर दिया था। डेढ़ साल तक जेल में बंद रहे विधायक सोम को उस समय राहत मिली, जब लखनऊ में एडवाईजरी बोर्ड ने रासुका के कारणों को गलत ठहराते हुए उसको निरस्त कर दिया। केस के अधिवक्ता अनिल जिंदल बताते है कि एसआईसी को कथित वीडियो क्लिप के वायरल किए जाने के कोई साक्ष्य नहीं मिले। चार साल की जांच के बाद मुकदमे में 2017 में एफआर लगा दी गई। उक्त कथित वीडियो क्लिप किसी बाहरी मुल्क की थी।

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