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गढ़ रोड पर कब्जाई जा रही नगर निगम की जमीन
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गढ़ रोड पर कब्जाई जा रही नगर निगम की जमीन
मेरठ। गढ़ मार्ग पर नई सड़क शास्त्री नगर जाने वाले मार्ग के कोने पर खाली बड़े भूखंड पर नगर निगम का मालिकाना हक है लेकिन इस पर कब्जा होता जा रहा है। कभी कौड़ियों के भाव ली गई इस जमीन की कीमत आज 145 करोड़ रुपये से ज्यादा है। व्यावसायिक श्रेणी की जमीन का सर्किल रेट ही 70 हजार रुपये वर्गमीटर के आसपास है। आईजीआरएस पोर्टल पर इस जमीन के कब्जे की शिकायत होने पर निगम ने स्वीकार किया कि कब्जा है। इसे हटाने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया था। बुधवार को टीम मौके पर गई लेकिन एक भी निर्माण नहीं हटाया गया।
शहर में तमाम सरकारी जमीन कब्जाई जा चुकी हैं लेकिन एक भी जमीन आज तक कब्जा मुक्त नहीं हुई है। जो जमीन बची हैं, उन पर भी कब्जा हो रहा है। गढ़ रोड पर नई सड़क शास्त्री नगर की तरफ जाने वाले मार्ग के दांये कोने पर 20,700 वर्गमीटर जमीन है। इसे 1951 में गणेशी लाल से लिया गया था और उसका प्रतिकर 20,375 रुपये दिया गया था। जमीन को नगर निगम (तब नगर पालिका) ने कूड़ा घर के रूप में उपयोग के लिए लिया था लेकिन कभी कब्जा नहीं ले पाया। जब आवास एवं विकास परिषद ने शास्त्री नगर योजना तैयार की तो इस जमीन को उसने लेना चाहा। निगम ने इससे इन्कार कर दिया।
बाद में जमीन को लेकर आवास एवं विकास परिषद और नगर निगम में कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस बीच दो अन्य लोग बलराज और सुखवीर भी इस जमीन पर मालिकाना हक को लेकर सामने आ गए और कोर्ट चले गए। इनकी अपील अपर जिला जज के न्यायालय में विचाराधीन है। शपथ पत्र दाखिल कर निगम कह चुका है कि यह जमीन उसकी है।
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कब्जेदारों ने बिजली के कनेक्शन भी ले लिए
निगम द्वारा जमीन पर कब्जा नहीं करने का परिणाम रहा कि गढ़ रोड की साइड से लेकर नई सड़क की साइड पर निर्माण हो गए, जिनमें दुकानें संचालित है। अवैध कब्जेदारों बिजली का कनेक्शन भी ले रखा है। भूखंड के पीछे का हिस्सा जयदेवी नगर से मिलता है। उस तरफ से भी जमीन पर कब्जा हो चुका है। कई बड़े निर्माण में 50 से 300 मीटर तक जमीन कब्जाई जा चुकी है। अनुमान के मुताबिक करीब 15 करोड़ रुपये कीमत की जमीन पर कब्जा हो चुका है।
ठंडे बस्ते में गया 2012 का निगम बोर्ड प्रस्ताव
मई, 2012 में तत्कालीन महापौर हरिकांत अहलूवालिया के कार्यकाल में चहारदीवारी कर जमीन सुरक्षित करने का प्रस्ताव बना। 34.80 लाख रुपये का बजट के सात ही यह भी तय हुआ था कि नगर निगम का दफ्तर, डिपो आदि यहीं स्थापित किया जाए। सभी प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चले गए।
जब बनाओगे, हटा देना
लोगों ने खोखे लगाकर अतिक्रमण किया है। कार्रवाई करते हैं तो व्यापार संघ सामने आ जाता है। कहते हैं कि जब निगम यहां कुछ बनाएगा, तब हटा देना।
- राजेश सिंह, संपत्ति अधिकारी, नगर निगम
निगम बना रहा योजना
नगर निगम इस जमीन पर कुछ बनाने के लिए प्लान कर रहा है। इसके लिए शासन से भी बात करेंगे। मामला फाइनल होते ही इसे खाली कराया जाएगा।
- मनीष बंसल, नगर आयुक्त
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मेरठ। गढ़ मार्ग पर नई सड़क शास्त्री नगर जाने वाले मार्ग के कोने पर खाली बड़े भूखंड पर नगर निगम का मालिकाना हक है लेकिन इस पर कब्जा होता जा रहा है। कभी कौड़ियों के भाव ली गई इस जमीन की कीमत आज 145 करोड़ रुपये से ज्यादा है। व्यावसायिक श्रेणी की जमीन का सर्किल रेट ही 70 हजार रुपये वर्गमीटर के आसपास है। आईजीआरएस पोर्टल पर इस जमीन के कब्जे की शिकायत होने पर निगम ने स्वीकार किया कि कब्जा है। इसे हटाने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया था। बुधवार को टीम मौके पर गई लेकिन एक भी निर्माण नहीं हटाया गया।
शहर में तमाम सरकारी जमीन कब्जाई जा चुकी हैं लेकिन एक भी जमीन आज तक कब्जा मुक्त नहीं हुई है। जो जमीन बची हैं, उन पर भी कब्जा हो रहा है। गढ़ रोड पर नई सड़क शास्त्री नगर की तरफ जाने वाले मार्ग के दांये कोने पर 20,700 वर्गमीटर जमीन है। इसे 1951 में गणेशी लाल से लिया गया था और उसका प्रतिकर 20,375 रुपये दिया गया था। जमीन को नगर निगम (तब नगर पालिका) ने कूड़ा घर के रूप में उपयोग के लिए लिया था लेकिन कभी कब्जा नहीं ले पाया। जब आवास एवं विकास परिषद ने शास्त्री नगर योजना तैयार की तो इस जमीन को उसने लेना चाहा। निगम ने इससे इन्कार कर दिया।
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बाद में जमीन को लेकर आवास एवं विकास परिषद और नगर निगम में कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस बीच दो अन्य लोग बलराज और सुखवीर भी इस जमीन पर मालिकाना हक को लेकर सामने आ गए और कोर्ट चले गए। इनकी अपील अपर जिला जज के न्यायालय में विचाराधीन है। शपथ पत्र दाखिल कर निगम कह चुका है कि यह जमीन उसकी है।
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कब्जेदारों ने बिजली के कनेक्शन भी ले लिए
निगम द्वारा जमीन पर कब्जा नहीं करने का परिणाम रहा कि गढ़ रोड की साइड से लेकर नई सड़क की साइड पर निर्माण हो गए, जिनमें दुकानें संचालित है। अवैध कब्जेदारों बिजली का कनेक्शन भी ले रखा है। भूखंड के पीछे का हिस्सा जयदेवी नगर से मिलता है। उस तरफ से भी जमीन पर कब्जा हो चुका है। कई बड़े निर्माण में 50 से 300 मीटर तक जमीन कब्जाई जा चुकी है। अनुमान के मुताबिक करीब 15 करोड़ रुपये कीमत की जमीन पर कब्जा हो चुका है।
ठंडे बस्ते में गया 2012 का निगम बोर्ड प्रस्ताव
मई, 2012 में तत्कालीन महापौर हरिकांत अहलूवालिया के कार्यकाल में चहारदीवारी कर जमीन सुरक्षित करने का प्रस्ताव बना। 34.80 लाख रुपये का बजट के सात ही यह भी तय हुआ था कि नगर निगम का दफ्तर, डिपो आदि यहीं स्थापित किया जाए। सभी प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चले गए।
जब बनाओगे, हटा देना
लोगों ने खोखे लगाकर अतिक्रमण किया है। कार्रवाई करते हैं तो व्यापार संघ सामने आ जाता है। कहते हैं कि जब निगम यहां कुछ बनाएगा, तब हटा देना।
- राजेश सिंह, संपत्ति अधिकारी, नगर निगम
निगम बना रहा योजना
नगर निगम इस जमीन पर कुछ बनाने के लिए प्लान कर रहा है। इसके लिए शासन से भी बात करेंगे। मामला फाइनल होते ही इसे खाली कराया जाएगा।
- मनीष बंसल, नगर आयुक्त