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मां आज भी पाकिस्तानी पर बेटे हिंदुस्तानी

Sat, 02 Sep 2017 05:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ शामली
अमर उजाला ब्यूरो/ शामली Updated Sat, 02 Sep 2017 05:31 PM IST
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Mother still Pakistani and son hindustani
बेटे हिंदुस्तानी मां पाकिस्तानी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

शामली में नाहिदा अख्तर जैसी और भी महिलाएं हैं, जो भारतीय नागरिकता पाने की आस लगाए बैठी हैं। कई अन्य महिलाओं ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया हुआ है। खास बात यह है कि इन महिलाओं के बच्चे देश में ही पैदा हुए, जिसके चलते वह हिंदुस्तानी हैं, लेकिन उनकी मां पर पाकिस्तानी नागरिकता होने का ठप्पा लगा हुआ है।  

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जिले में कई पाकिस्तानी नागरिकता प्राप्त महिलाएं करीब 20, 30 साल से शामली जनपद में रह रही है। प्रत्येक महिला को लांग टर्म वीजा (एलटीवी) पर रहना पड़ रहा है। इतने लंबे समय तक भारत में रहने के बावजूद नागरिकता नहीं मिल पाने की टीस मन में रहती है। महिलाओं का कहना है कि शादी के बाद महिला अपना घर छोड़ देती है और पति का घर ही उसका घर हो जाता है। बावजूद इसके पाकिस्तान में पैदा हुई इन महिलाओं को पति के यहां भी बेगानों की तरह रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिले में ऐसी आठ महिलाओं  ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है, जो पाकिस्तानी हैं। यह सभी महिलाएं एलटीवी पर रह रही हैं। अब उनकी भी आस जगी है।  
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नागरिकता मिलने की उम्मीद जगी  
शहर के मोहल्ला काजीवाड़ा निवासी सलाउद्दीन की शादी पाकिस्तान के लाहौर निवासी शगुफ्ता के साथ हुई थी। 1983 से शगुफ्ता शामली में अपने पति के यहां रहती है। परिवार में दो बेटी तथा दो बेटे हैं। पति सलाउद्दीन ट्रैक्टर मैकेनिक हैं। बच्चे और पति हिंदुस्तानी है, लेकिन शगुफ्ता आज भी पाकिस्तानी नागरिक के रूप में रहती है। 20 साल पूर्व शगुफ्ता ने भारतीय नागरिकता पाने के लिए आवेदन किया था। शगुफ्ता का कहना है कि उम्मीद लगाए बैठी हूं कि भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।

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13 साल पहले हुआ था निकाह

Mother still Pakistani and son hindustani
बागपत स्थित केतीपुरा मोहल्ले में बेटे के साथ नूरजहां - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

कस्बा कैराना के मोहल्ला पीपलोतला में एक छोटे से मकान में रहने वाली नाहिदा पाकिस्तानी है। उसका निकाह 13 साल पूर्व मोहल्ला पीपलोतला निवासी मोहम्मद अनीस के साथ हुआ था। नाहिदा के तीन बेटे और दो बेटियां है, जो कैराना में ही पैदा हुए। पति अनीस का एक साल पूर्व बीमारी के चलते इंतकाल हो गया था। पति की मौत के बाद बच्चों के पालन  पोषण की जिम्मेदारी नाहिदा पर आ गई। 13 साल से कैराना में रह रही नाहिदा ने आठ साल पूर्व ही नागरिकता के लिए आवेदन किया था। नाहिदा का कहना है कि भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया हुआ है। अभी तक नागरिकता नहीं मिल पाई है।  

अभी तक नहीं मिल पाई नागरिकता
कस्बा कैराना के मोहल्ला खैलकला खुरगान रोड पर एक छोटे से मकान में मोहम्मद सलीम का परिवार रहता है। सलीम का निकाह 1999 में पाकिस्तान निवासी गुलाम फातमा के साथ हुआ था। 18 साल पूर्व गुलाम फातमा कैराना आकर रहने लगी थी। गुलाम फातमा के दो बच्चे हैं। उसका पति सलीम पेशे से दर्जी है। सलीम ने बताया कि पत्नी को भारतीय नागरिकता दिलाने के लिए आवेदन करने के बाद काफी प्रयास किया, लेकिन अब तक नागरिकता नहीं मिल पाई। जिस तरह नाहिदा अख्तर को नागरिकता मिलना लगभग तय हो गया है, उम्मीद है कि उसकी पत्नी को भी नागरिकता मिल जाएगी।

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