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दावा 72 घंटे में भुगतान का, लग रहे छह दिन, धान खरीद एजेंसियों पर किसानों का 1.74 करोड़ रुपये बकाया

Sun, 01 Nov 2020 01:12 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 01 Nov 2020 01:12 AM IST
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more than one crore rupees outstanding payment on paddy procurement agencies in saharanpur
kashmiri basmati rice - फोटो : सोशल मीडिया
धान खरीद पर 72 घंटे में किसान के खाते में भुगतान भेजने की व्यवस्था है, लेकिन धान खरीद एजेंसियां इस आदेश पर अमल नहीं कर रही है। किसानों को छह से सात दिन का इंतजार करना पड़ रहा है, तब उनके खाते में भुगतान पहुंच पा रहा है। 
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सहारनपुर जनपद में अब तक 9.83 करोड़ रुपये कीमत के धान की खरीद सरकारी क्रय केंद्रों पर हो चुकी है, जबकि भुगतान  8.09 करोड़ का ही हुआ है। ऐसे में करीब 1.74 करोड़ रुपये अभी भी क्रय एजेंसियों पर किसानों के बकाया हैं। किसानों के खाते में धान का मूल्य ट्रांसफर होने में औसतन सप्ताह भर लग रहा है। समय से भुगतान नहीं मिलने पर किसान भी परेशान हैं। 
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जिले में धान की रिकाॅर्ड खरीद 
सहारनपुर जनपद को इस वर्ष 2000 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य मिला। 30 अक्तूबर तक 5263 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। क्रय एजेंसियों को खरीदे गए धान का मूल्य बैंक खाता सत्यापन के बाद 72 घंटे के अंदर किसान के खाते में ट्रांसफर करने का नियम है।
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किसान बोले, होना चाहिए सुधार 
नागल क्षेत्र के गांव पनियाली कासिमपुर निवासी किसान अर्पित कुमार ने बताया कि उन्होंने 24 अक्तूबर को 50 क्विंटल धान नागल किसान सेवा सहकारी समिति में सरकारी क्रय केंद्र पर बेचा था। लेकिन आज तक बैंक खाते में भुगतान नहीं आया है। भुगतान की प्रक्रिया में सुधार होना चाहिए। 

छुटमलपुर क्षेत्र के गांव कमालपुर निवासी किसान विजय उर्फ जोनी राणा ने बताया कि उन्होंने 24 अक्तूबर को अपना 42 क्विंटल धान को रसूलपुर मंडी यार्ड स्थित  सरकारी धान क्रय केंद्र पर तुलवाया था। अभी तक बेचे गए धान का भुगतान उनके बैंक खाते में नहीं आया है।

धान क्रय केंद्र ----- 24
धान का रकबा ---- 60 हजार हेेक्टेयर
बासमती धान ----- 48 हजार हेक्टेयर
सामान्य धान ----- 12 हजार हेक्टेयर

क्रय एजेंसियों के पास धनराशि की कोई कमी नहीं है। धान का भुगतान पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) के माध्यम से किसान के खाते में भेजा जाता है। तकनीकी और प्रक्रियागत देरी की वजह से भुगतान प्रभावित हो रहा है। जिले में खरीदे गए धान की 82 प्रतिशत धनराशि किसानों के खाते में भेजी जा चुकी है। करीब 18 फीसदी धनराशि किसानों के खाते में भेजने की प्रक्रिया चल रही है। - प्रिंस चौधरी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।


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