पल-पल बदलता रहा क्रांतिधरा का मिजाज, अटकी रहीं सांसें
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क्रांतिधरा मेरठ में लोकसभा चुनाव का मिजाज पल पल बदलता ही रहा। भले ही भाजपा ने जीत दर्ज कर ली हो, लेकिन अंत तक भाजपाइयों की सांसें भी अटकी रहीं। मुकाबला अंत तक बराबरी पर ही चला और मामूली अंतर से भाजपा जीती।
चुनाव केशुरुआती पांच चरणों से ही यह साफ होने लगा था कि मुकाबला टक्कर का होगा। हालांकि इन पांच चरणों में भाजपा ने बढ़त बना ली थी और आधे चरण होते होते एक समय आया जब राजेन्द्र अग्रवाल की लीड चालीस हजार के पार चली गई।
इसके बाद अचानक हाथी ने गति पकड़ी और याकूब कुरैशी की लीड बढ़ती चली गई। न केवल उन्होंने राजेन्द्र अग्रवाल की इस लीड को काटाबल्कि लगभग इतनी ही वोटों की बढ़त बना ली। आखिरी समय तक याकूब की बढ़त चलती रही। एक बार यह बढ़त आठ हजार वोटों तक आ गई। 15 चरणों के बाद स्थिति में परिवर्तन होना शुरू हो गया था जो धीरे धीरे रूप बदलता रहा।
मुकाबला टक्कर का हो गया। एक समय ऐसा रहा जब एक लाख 13 हजार वोटों की मतगणना हो गई और इसमें राजेन्द्र अग्रवाल को 11 हजार वोटों की लीड मिल गई। इसके बाद फिर से याकूब की वोटों का ग्राफ बढ़ा और यह अंतर और कम हो गया।
दरअसल यह मुकाबला इतना कड़ा रहा जब दोनों ही पार्टी के धुरंधरों के पसीने छूटते रहे। एक बार तो राजेन्द्र अग्रवाल के खेमें में भी पूरी तरह से मायूसी छा गई। वह बीच में चले भी गए पर जब यह लगा कि बाजी हाथ से निकल रही है तो वापस लौट आए।
उधर अंतर इतना मामूली रहा गया कि हाजी याकूब कुरैशी शाम को खुद मतगणना स्थल पर आ गए। दरअसल उनके पुुत्र फिरोज ने भी आपत्ति दर्ज करा दी था कि कुछ गड़बड़ी है। अभी काउंटिंग चल रही है और भाजपाइयों को जीता हुआ बताया जा रहा है।
आखिरकार रात को उस समय तक भाजपाइयों के भी होश उड़े रहे जब लगभग साढ़े आठ बजे याकूब कुरैशी ने पंडाल से बाहर आकर खुद कहा कि वह हार गए हैं और वह लोकतंत्र के इस फैसले को स्वीकार करते ह्रैं।
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